बक्सर में रेलवे गुमटी खोलने की मांग तेज, ग्रामीणों ने दिया 5 दिन का अल्टीमेटम
Demand for Railway Crossing Reopening Intensifies in Buxar, Villagers Issue 5-Day Ultimatum
बक्सर जिले में रेलवे गुमटी (लेवल क्रॉसिंग) को फिर से खोलने की मांग अब जोर पकड़ रही है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस संबंध में रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन को 5 दिन का अल्टीमेटम दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस अवधि में उनकी मांग पर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो वे बड़े पैमाने पर चक्का जाम और धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
यह मामला बक्सर के एक महत्वपूर्ण रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों का तर्क है कि इस गुमटी के बंद होने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दैनिक जीवन के कार्यों, बच्चों के स्कूल जाने, किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच में बाधा आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गुमटी दशकों से उपयोग में थी और इसके अचानक बंद होने से क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से संपर्क किया है, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसी कारण अब उन्होंने एकजुट होकर आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 5 दिनों के भीतर गुमटी को नहीं खोला गया, तो वे सड़कों पर उतरेंगे और रेल व सड़क यातायात को बाधित करेंगे। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं के शामिल होने की संभावना है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी ग्रामीणों की इस मांग का समर्थन किया है और प्रशासन से जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यह केवल एक गुमटी का मामला नहीं है, बल्कि हजारों लोगों के दैनिक जीवन और उनके अधिकारों का सवाल है। प्रशासन को इस संवेदनशील मुद्दे पर तुरंत ध्यान देना चाहिए ताकि स्थिति और बिगड़ने से बचा जा सके।
The demand for the reopening of a railway level crossing in Buxar district is gaining momentum. Local villagers have issued a 5-day ultimatum to the railway and district administrations, threatening a widespread road and rail blockade if their demands are not met within this period. The closure of this railway crossing has reportedly caused significant inconvenience to residents, affecting daily commutes, access to schools, farms, and emergency services. Villagers claim the crossing has been in use for decades and its sudden closure has negatively impacted the region's economic and social activities. Despite repeated appeals to local authorities and railway officials, their grievances have gone unaddressed, prompting the decision to resort to a protest. Local public representatives have also voiced support for the villagers, urging the administration to resolve the issue swiftly to prevent further escalation.
स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर
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