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पूर्णिया में वित्तरहित शिक्षा नीति के खिलाफ शिक्षकों का प्रदर्शन: कांग्रेस सेवादल ने दिया समर्थन

Teachers Protest Against Non-Grant Education Policy in Purnia, Congress Sevadal Joins

Dainik Bhaskar15 जुलाई 2026
पूर्णिया

पूर्णिया में वित्तरहित शिक्षा नीति के विरोध में शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कांग्रेस सेवादल के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतरे। भारी बारिश के बावजूद शिक्षकों का उत्साह कम नहीं हुआ और उन्होंने सरकार की इस नीति के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

शिक्षकों का कहना है कि वित्तरहित शिक्षा नीति उनके भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों के लिए हानिकारक है। इस नीति के तहत, शिक्षकों को बिना किसी सरकारी अनुदान के शिक्षण कार्य करना पड़ता है, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनका आरोप है कि सरकार शिक्षकों के साथ अन्याय कर रही है और उन्हें उनके वाजिब हक से वंचित कर रही है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने मांग की कि सरकार इस नीति को तत्काल वापस ले और वित्तरहित शिक्षकों को भी समान अधिकार और सुविधाएं प्रदान करे, जो अन्य सरकारी शिक्षकों को मिलती हैं।

कांग्रेस सेवादल के कार्यकर्ताओं ने भी शिक्षकों के इस आंदोलन को पूरा समर्थन दिया। सेवादल के नेताओं ने कहा कि वे शिक्षकों की मांगों के साथ हैं और सरकार पर इस नीति को रद्द करने का दबाव बनाएंगे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से ले और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए। प्रदर्शन के दौरान, शिक्षकों और सेवादल के सदस्यों ने नारे लगाए और सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने का आग्रह किया।

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब शिक्षा क्षेत्र में कई सुधारों की बात चल रही है, लेकिन शिक्षकों का मानना है कि ये सुधार तभी सफल हो सकते हैं जब शिक्षकों के हितों का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।

Teachers in Purnia staged a massive protest against the non-grant education policy, with strong support from Congress Sevadal. Despite heavy rain, a large number of teachers took to the streets, raising their voices against the government's policy. They argue that the non-grant education policy is detrimental to their future and the quality of education, forcing them to teach without government grants and face severe financial hardship. The protesting teachers accused the government of injustice and depriving them of their rightful entitlements. They demanded the immediate withdrawal of the policy and equal rights and facilities for non-grant teachers, similar to those enjoyed by other government teachers.

Congress Sevadal workers fully backed the teachers' movement. Sevadal leaders pledged their support, vowing to pressure the government to revoke the policy. They urged the government to address the teachers' issues seriously and take concrete steps for their resolution. During the protest, teachers and Sevadal members chanted slogans, appealing to the government to fulfill their demands. This demonstration comes amidst discussions of various reforms in the education sector, but teachers believe these reforms can only succeed if their interests are also considered. They warned of intensified protests if their demands are not met.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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