चैती छठ
Chaiti Chhath
कब
चैत्र शुक्ल षष्ठी (मुख्य संध्या अर्घ्य); चार दिन का पर्व चतुर्थी से सप्तमी तक
तिथि स्विस एफ़ेमेरिस पंचांग से गणना की गई है — पंचांग देखें।
कहाँ
पूरे बिहार में — नदी घाट व तालाब
चैती छठ वर्ष का दूसरा छठ है, जो चैत्र मास में मनाया जाता है। विधि कार्तिक के छठ जैसी ही है — वही चार दिन, वही निर्जला व्रत और वही सूर्य उपासना — अंतर केवल मौसम और संख्या का है। कार्तिक का छठ बिहार का महापर्व है और घर-घर मनाया जाता है, जबकि चैती छठ कम लोग रखते हैं, इसलिए घाटों पर भीड़ भी बहुत कम रहती है।
महत्व
- वर्ष के दो छठ में से एक — विधि कार्तिक वाले छठ के समान।
- चार दिन का क्रम: नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य।
- मुख्य व्रत निर्जला होता है, खरना की शाम से उषा अर्घ्य तक।
- कम व्रतियों के कारण यह अधिक शांत और घर-केंद्रित रहता है।
मेले में क्या होता है
- घाट पर संध्या अर्घ्य और अगली भोर उषा अर्घ्य दिया जाता है।
- ठेकुआ और मौसमी फल प्रसाद में रहते हैं, कार्तिक छठ की तरह।
- कार्तिक छठ जैसी व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था प्रायः नहीं होती, क्योंकि भीड़ कम रहती है।
- चैत्र में गर्मी बढ़ने लगती है, जिससे निर्जला व्रत अधिक कठिन हो जाता है।
कैसे पहुँचें
- यह राज्यव्यापी पर्व है — नज़दीकी नदी घाट या तालाब पर ही मनाया जाता है।
- कार्तिक छठ की तुलना में घाटों पर भीड़ बहुत कम रहती है।
ज़रूरी बातें
- चैत्र में दिन गर्म होने लगते हैं — निर्जला व्रत में व्रती के लिए छाया और विश्राम का ध्यान रखें।
- घाट पर गहरे पानी से दूर रहें और बच्चों को अकेला न छोड़ें।
- घाट की सफ़ाई और व्यवस्था कार्तिक छठ जैसी नहीं होती — पहले देख लें।
- व्रती के लिए अलग, साफ़ बर्तन और सूप पहले से तैयार रखें।
सामान्य प्रश्न
चैती छठ कब है?
चैत्र शुक्ल षष्ठी को मुख्य संध्या अर्घ्य होता है; पर्व चतुर्थी से सप्तमी तक चार दिन चलता है।
चैती छठ और कार्तिक छठ में अंतर क्या है?
विधि एक ही है। कार्तिक का छठ बड़ा और व्यापक है; चैती छठ चैत्र में कम लोग रखते हैं।
चैती छठ कितने दिन का है?
चार दिन — नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य।
चैती छठ का व्रत कठिन क्यों माना जाता है?
चैत्र में गर्मी बढ़ने लगती है, जिससे लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत अधिक कठिन हो जाता है।
अंतिम अपडेट: 2026-10