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मधुश्रावणी

Madhushravani

कब

श्रावण मास — नागपंचमी के आसपास से कई दिन

तिथि स्विस एफ़ेमेरिस पंचांग से गणना की गई है — पंचांग देखें।

कहाँ

मिथिला क्षेत्र — नवविवाहिताओं के घर

मधुश्रावणी मिथिला का वह पर्व है जो केवल नवविवाहिता स्त्रियाँ मनाती हैं — विवाह के बाद पहले सावन में। लगभग दो सप्ताह तक रोज़ पूजा, कथा-श्रवण और फूल-पत्ते संचय का क्रम चलता है, और यह पर्व मिथिला की वैवाहिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। इसकी विशिष्टता इसकी अवधि और इसके लोकगीतों में है, जो किसी और पर्व में नहीं मिलते।

महत्व

  • केवल नवविवाहिताओं का पर्व — विवाह के बाद पहले श्रावण में मनाया जाता है।
  • गौरी और नाग देवता की पूजा इसका केंद्रीय भाग है।
  • रोज़ कथा सुनने की परंपरा है, जो पूरे पर्व में क्रमशः आगे बढ़ती है।
  • मैथिली लोकगीतों की एक अलग परंपरा इस पर्व से जुड़ी है।

मेले में क्या होता है

  • रोज़ सुबह फूल, पत्ते और पूजन सामग्री इकट्ठा करने की परंपरा निभाई जाती है।
  • गौरी पूजन और नाग पूजन के साथ कथा का पाठ होता है।
  • परिवार और पड़ोस की महिलाएँ समूह में गीत गाती हैं।
  • अंतिम दिन विशेष अनुष्ठान के साथ पर्व पूरा होता है; मायके से सामग्री और वस्त्र भेजे जाने की परंपरा है।

कैसे पहुँचें

  • यह घर में मनाया जाने वाला पर्व है — कोई सार्वजनिक आयोजन स्थल नहीं।
  • मिथिला क्षेत्र के ज़िलों — मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, समस्तीपुर — में यह सबसे व्यापक है।

ज़रूरी बातें

  • पर्व लंबा है — पूजन सामग्री और फूल-पत्तों की व्यवस्था पहले से योजना बनाकर करें।
  • सावन में बारिश लगातार होती है; रोज़ के संचय के लिए इसका ध्यान रखें।
  • विधि परिवार और गाँव के अनुसार भिन्न होती है — घर की परंपरा का पालन सबसे उचित है।

सामान्य प्रश्न

मधुश्रावणी कौन मनाती हैं?

नवविवाहिता स्त्रियाँ — विवाह के बाद पहले सावन में।

मधुश्रावणी कब मनाई जाती है?

श्रावण मास में, नागपंचमी के आसपास से लगभग दो सप्ताह तक।

इस पर्व में किसकी पूजा होती है?

गौरी और नाग देवता की, कथा-श्रवण के साथ।

यह पर्व कहाँ मनाया जाता है?

मुख्यतः मिथिला क्षेत्र में — मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी और आसपास।

अंतिम अपडेट: 2026-10