बौंसी मंदार मेला
Bounsi Mandar Mela
कब
14 जनवरी 2027 · मकर संक्रांति से कई दिन
मकर संक्रांति से आरंभ
तिथि स्विस एफ़ेमेरिस पंचांग से गणना की गई है — पंचांग देखें।
बौंसी मंदार मेला बांका ज़िले का सबसे पुराना और सबसे बड़ा मेला है, जो मकर संक्रांति से मंदार पर्वत की तलहटी में लगता है। परंपरा मंदार पर्वत को समुद्र मंथन की कथा के मंदराचल से जोड़ती है, और पहाड़ी के नीचे पापहरणी सरोवर इस आयोजन का केंद्र है। यह मेला धार्मिक आयोजन और क्षेत्रीय मेला — दोनों एक साथ है।
महत्व
- परंपरा में मंदार पर्वत को समुद्र मंथन की कथा का मंदराचल माना जाता है।
- पापहरणी सरोवर में मकर संक्रांति पर स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।
- मंदार पर्वत जैन परंपरा से भी जुड़ा है, इसलिए यह स्थान दो परंपराओं का साझा तीर्थ है।
- मधुसूदन मंदिर और पर्वत पर स्थित स्थल इस क्षेत्र के प्रमुख दर्शन केंद्र हैं।
मेले में क्या होता है
- मकर संक्रांति पर पापहरणी में स्नान और मंदिर में पूजा से मेला शुरू होता है।
- पर्वत पर चढ़ाई और ऊपर के स्थलों के दर्शन इन दिनों सबसे अधिक होते हैं।
- तलहटी में पशु, हस्तशिल्प, कृषि उपकरण और घरेलू सामान का बड़ा बाज़ार लगता है।
- झूला, प्रदर्शनी और लोक मनोरंजन के मंच मेले का हिस्सा रहते हैं।
कैसे पहुँचें
- रेल: बौंसी स्टेशन भागलपुर–दुमका मार्ग पर है।
- सड़क: बांका और भागलपुर दोनों से बौंसी सड़क मार्ग से जुड़ा है।
- नज़दीकी बड़ा जंक्शन भागलपुर है।
ज़रूरी बातें
- मकर संक्रांति के दिन सबसे अधिक भीड़ रहती है; पर्वत पर चढ़ाई के लिए सुबह का समय ठीक रहता है।
- जनवरी में इस क्षेत्र में अच्छी ठंड होती है — गर्म कपड़े ज़रूरी हैं।
- पर्वत का रास्ता चढ़ाई वाला है; आरामदायक जूते पहनें।
- सरोवर के किनारे फिसलन रहती है, बच्चों के साथ सावधानी रखें।
सामान्य प्रश्न
बौंसी मंदार मेला कब लगता है?
मकर संक्रांति से — इस पेज पर ऊपर गणना की गई तारीख दी गई है।
मंदार पर्वत क्यों प्रसिद्ध है?
परंपरा इसे समुद्र मंथन की कथा के मंदराचल से जोड़ती है; यह जैन परंपरा से भी जुड़ा स्थान है।
पापहरणी क्या है?
मंदार पर्वत की तलहटी का सरोवर, जहाँ मकर संक्रांति पर स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।
बौंसी कैसे पहुँचें?
बौंसी रेलवे स्टेशन, या बांका और भागलपुर से सड़क मार्ग।
अंतिम अपडेट: 2026-10