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श्रावणी मेला, सुल्तानगंज

Shravani Mela, Sultanganj

कब

पूरे श्रावण (सावन) मास — एक महीने से अधिक

तिथि स्विस एफ़ेमेरिस पंचांग से गणना की गई है — पंचांग देखें।

कहाँ

सुल्तानगंज, भागलपुर — उत्तरवाहिनी गंगा घाट

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श्रावणी मेला बिहार का सबसे लंबा चलने वाला मेला है और यह एक जगह का आयोजन नहीं, एक यात्रा है। सावन भर कांवरिये सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरते हैं और पैदल चलकर देवघर (झारखंड) के बाबा बैद्यनाथ धाम में जलार्पण करते हैं। सुल्तानगंज इस पूरी यात्रा का आरंभ बिंदु है, इसलिए सावन में यह छोटा कस्बा लाखों भगवा वस्त्रधारी यात्रियों से भर जाता है।

महत्व

  • सुल्तानगंज में गंगा उत्तर की ओर बहती हैं — इस 'उत्तरवाहिनी' प्रवाह से भरे जल को विशेष पवित्र माना जाता है।
  • यात्रा पैदल और नंगे पाँव की जाती है; कांवर को ज़मीन पर नहीं रखा जाता, यही इसका मुख्य नियम है।
  • मार्ग पर 'बोल बम' का उद्घोष और भगवा वस्त्र इस मेले की पहचान हैं।
  • डाक बम वे यात्री होते हैं जो बिना रुके, तय समय में पूरी दूरी तय करते हैं।

मेले में क्या होता है

  • सुल्तानगंज घाट पर जल भरने और कांवर तैयार करने का क्रम पूरे महीने चलता रहता है।
  • मार्ग पर अस्थायी ठहराव, भोजन, चिकित्सा शिविर और पैर की देखभाल की व्यवस्था रहती है।
  • सोमवार और सावन की विशेष तिथियों पर भीड़ सबसे अधिक होती है।
  • बिहार और झारखंड दोनों का प्रशासन मिलकर मार्ग, सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था देखता है।

कैसे पहुँचें

  • रेल: सुल्तानगंज स्टेशन भागलपुर–किऊल रेलमार्ग पर है; भागलपुर सबसे नज़दीकी बड़ा जंक्शन है।
  • सड़क: भागलपुर से सुल्तानगंज नियमित बस व छोटे वाहनों से जुड़ा है।
  • यात्रा का दूसरा छोर देवघर है, जो झारखंड में पड़ता है।

ज़रूरी बातें

  • पैदल यात्रा लंबी है — पैरों की देखभाल, पट्टी और आरामदायक चाल सबसे ज़रूरी बातें हैं।
  • सावन में लगातार बारिश होती है; कांवर और कपड़ों के लिए बरसाती साथ रखें।
  • जल भरने के बाद कांवर नीचे न रखने का नियम निभाना है, तो विश्राम के लिए स्टैंड की व्यवस्था देख लें।
  • भीड़ वाले सोमवार से बचना हो तो सप्ताह के बीच के दिन चुनें।

सामान्य प्रश्न

श्रावणी मेला कब लगता है?

पूरे सावन मास में — यह एक महीने से अधिक चलता है, और इसकी तिथियाँ हर साल पंचांग से तय होती हैं।

सुल्तानगंज से देवघर कितनी दूर है?

यह लंबी पैदल यात्रा है जिसे कांवरिये प्रायः एक से तीन दिन में पूरा करते हैं; डाक बम इसे बहुत कम समय में तय करते हैं।

सुल्तानगंज का जल विशेष क्यों माना जाता है?

यहाँ गंगा उत्तरवाहिनी हैं, और इस प्रवाह से भरे जल को बैद्यनाथ धाम में अर्पण के लिए विशेष माना जाता है।

कांवर यात्रा का मुख्य नियम क्या है?

जल भरने के बाद कांवर को ज़मीन पर नहीं रखा जाता, और यात्रा प्रायः नंगे पाँव पूरी की जाती है।

सुल्तानगंज कैसे पहुँचें?

रेल से सुल्तानगंज स्टेशन या भागलपुर जंक्शन, और भागलपुर से सड़क मार्ग।

अंतिम अपडेट: 2026-10