प्रमंडलTirhutSaranDarbhangaKosiPurniaBhagalpurMungerPatnaMagadh

सिंहेश्वर मेला, मधेपुरा

Singheshwar Mela, Madhepura

कब

15 फरवरी 2026 · महाशिवरात्रि से कई दिन

महाशिवरात्रि (फाल्गुन) से आरंभ; मेला उसके बाद कई दिन चलता है

तिथि स्विस एफ़ेमेरिस पंचांग से गणना की गई है — पंचांग देखें।

कहाँ

सिंहेश्वर स्थान, मधेपुरा — शिव मंदिर परिसर

मधेपुरा ज़िले की खबरें →

सिंहेश्वर स्थान मधेपुरा का सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिर है और महाशिवरात्रि पर यहाँ कोसी क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला लगता है। परंपरा इस स्थान को शृंगी ऋषि से जोड़ती है, और इसी नाम से स्थान का नाम सिंहेश्वर पड़ा माना जाता है। शिवरात्रि की रात जलाभिषेक के लिए मधेपुरा, सहरसा, सुपौल और पूर्णिया तक से श्रद्धालु पहुँचते हैं।

महत्व

  • कोसी क्षेत्र का प्रमुख शिव तीर्थ — स्थानीय पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ।
  • महाशिवरात्रि की रात जलाभिषेक मुख्य अनुष्ठान है, जो रातभर चलता है।
  • परंपरा में यह स्थान शृंगी ऋषि की तपोभूमि माना जाता है।
  • मेला धार्मिक आयोजन के साथ-साथ क्षेत्र का बड़ा ग्रामीण बाज़ार भी है।

मेले में क्या होता है

  • शिवरात्रि की रात मंदिर में जलाभिषेक के लिए लंबी कतार लगती है।
  • परिसर के बाहर मिठाई, खिलौने, बर्तन, कृषि उपकरण और घरेलू सामान की दुकानें सजती हैं।
  • झूला, प्रदर्शनी और लोक मनोरंजन के मंच मेले का हिस्सा रहते हैं।
  • प्रशासन भीड़ नियंत्रण, कतार और यातायात के लिए अलग व्यवस्था करता है।

कैसे पहुँचें

  • सड़क: मधेपुरा शहर से सिंहेश्वर नज़दीक है और स्थानीय वाहनों से जुड़ा हुआ है।
  • रेल: मधेपुरा स्टेशन सबसे नज़दीकी विकल्प है; सहरसा बड़ा जंक्शन है।
  • सहरसा और सुपौल दोनों तरफ़ से सड़क मार्ग उपलब्ध है।

ज़रूरी बातें

  • शिवरात्रि की रात भीड़ चरम पर रहती है — जलाभिषेक के लिए समय लेकर जाएँ।
  • फाल्गुन की रातें ठंडी होती हैं; रातभर रुकने वालों के लिए गर्म कपड़े ज़रूरी हैं।
  • मेले में जेब और सामान की सावधानी रखें, भीड़ बहुत घनी होती है।
  • बच्चों के साथ जाएँ तो मिलने का एक स्थान पहले तय कर लें।

सामान्य प्रश्न

सिंहेश्वर मेला कब लगता है?

महाशिवरात्रि से — इस पेज पर ऊपर गणना की गई तारीख दी गई है। मेला उसके बाद कई दिन चलता है।

सिंहेश्वर स्थान कहाँ है?

मधेपुरा ज़िले में, मधेपुरा शहर के पास — कोसी क्षेत्र का प्रमुख शिव मंदिर।

सिंहेश्वर नाम कैसे पड़ा?

परंपरा इस स्थान को शृंगी ऋषि से जोड़ती है, और इसी से स्थान का नाम सिंहेश्वर माना जाता है।

मुख्य अनुष्ठान क्या है?

महाशिवरात्रि की रात का जलाभिषेक, जिसके लिए रातभर कतार लगी रहती है।

अंतिम अपडेट: 2026-10