सोनपुर मेला (हरिहर क्षेत्र मेला)
Sonepur Mela (Harihar Kshetra Mela)
कब
24 नवंबर 2026 · कार्तिक पूर्णिमा से कई सप्ताह
कार्तिक पूर्णिमा से आरंभ; मेला उसके बाद कई सप्ताह चलता है
तिथि स्विस एफ़ेमेरिस पंचांग से गणना की गई है — पंचांग देखें।
सोनपुर मेला गंगा और गंडक के संगम पर, सारण ज़िले के सोनपुर में लगता है और कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होता है। इसे हरिहर क्षेत्र मेला भी कहा जाता है और परंपरागत रूप से यह एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। आरंभ के दिन श्रद्धालु संगम में स्नान कर हरिहरनाथ मंदिर में जल चढ़ाते हैं।
महत्व
- हरिहरनाथ मंदिर — शिव और विष्णु, दोनों के एक रूप की मान्यता, जिससे क्षेत्र का नाम 'हरिहर क्षेत्र' पड़ा।
- कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा-गंडक संगम में स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।
- पशु मेला सदियों पुरानी व्यापारिक परंपरा है — यही इसे सामान्य धार्मिक मेले से अलग करता है।
मेले में क्या होता है
- कार्तिक पूर्णिमा पर संगम स्नान और हरिहरनाथ मंदिर में पूजा — मेले का सबसे भीड़भाड़ वाला दिन।
- पशु बाज़ार: गाय-भैंस, घोड़े, बकरी और पक्षियों के अलग-अलग खंड। संरक्षित वन्यजीवों का क्रय-विक्रय वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत प्रतिबंधित है।
- हस्तशिल्प, लकड़ी व बेंत का सामान, कृषि उपकरण और स्थानीय व्यापार की दुकानें।
- झूला, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक मंच — शाम का मुख्य आकर्षण।
कैसे पहुँचें
- रेल: सोनपुर जंक्शन मेला स्थल के निकट है और पटना व मुज़फ़्फ़रपुर दोनों तरफ़ से जुड़ा है।
- सड़क: पटना से लगभग 25 किलोमीटर — जेपी सेतु (दीघा–सोनपुर) या महात्मा गांधी सेतु होकर हाजीपुर के रास्ते।
- नज़दीकी हवाई अड्डा पटना है।
ज़रूरी बातें
- आरंभ के दिन और उसके बाद का सप्ताहांत सबसे भीड़भाड़ वाला रहता है; पशु खंड सुबह सबसे सक्रिय होता है।
- कार्तिक पूर्णिमा की भोर में संगम घाट पर स्नान के लिए बहुत भीड़ होती है — बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ सावधानी रखें।
- मेला परिसर बड़ा और खुला है; नकदी, पानी और आरामदायक जूते साथ रखें।
- ठहरने की व्यवस्था सीमित रहती है — पटना या हाजीपुर में रुकना आसान पड़ता है।
आधिकारिक स्रोत
सामान्य प्रश्न
सोनपुर मेला कब शुरू होता है?
कार्तिक पूर्णिमा से। इस पेज पर ऊपर गणना की गई तारीख दी गई है।
सोनपुर मेला कहाँ लगता है?
सारण ज़िले के सोनपुर में, गंगा और गंडक नदी के संगम पर — पटना से करीब 25 किलोमीटर।
सोनपुर मेला कितने दिन चलता है?
कार्तिक पूर्णिमा से आरंभ होकर मेला कई सप्ताह चलता है; अवधि हर साल प्रशासन तय करता है।
सोनपुर मेले को हरिहर क्षेत्र मेला क्यों कहते हैं?
यहाँ स्थित हरिहरनाथ मंदिर के कारण — हरि (विष्णु) और हर (शिव) के एक रूप की मान्यता से क्षेत्र का नाम हरिहर क्षेत्र पड़ा।
पटना से सोनपुर मेला कैसे पहुँचें?
सड़क से जेपी सेतु (दीघा–सोनपुर) होकर लगभग 25 किलोमीटर, या रेल से सोनपुर जंक्शन तक।
अंतिम अपडेट: 2026-10