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5 करोड़ की सड़क सिर्फ बोर्ड पर: जमीन पर काम शुरू नहीं, लोग गड्ढों में सफर को मजबूर

5 Crore Road Only on Board: Work Not Started, Locals Forced to Travel in Potholes

Dainik Bhaskar2 जुलाई 2026

बिहार में विकास परियोजनाओं की धीमी गति और भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है। एक पांच करोड़ रुपये की सड़क परियोजना, जिसका टेंडर हुए काफी समय हो गया है, वह केवल कागजों और एक सूचना बोर्ड तक ही सीमित रह गई है। जमीन पर इस सड़क का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब लोग रोजाना टूटी-फूटी और गड्ढों से भरी सड़कों पर यात्रा करने को मजबूर होते हैं। कई जगहों पर तो सड़क का नामोनिशान तक नहीं है, सिर्फ धूल और मिट्टी ही दिखती है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब ये गड्ढे पानी से भर जाते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश की है, लेकिन उनकी शिकायतें अनसुनी कर दी जाती हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि नई सड़क बनने से उनका आवागमन सुगम होगा और समय की भी बचत होगी। लेकिन अब आलम यह है कि पांच करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क सिर्फ एक सपना बनकर रह गई है। इस स्थिति से न केवल आम जनता को परेशानी हो रही है, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में मुश्किल हो रही है, और छोटे व्यवसायी भी प्रभावित हो रहे हैं।

यह एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है कि आखिर इतनी बड़ी राशि की परियोजना को क्यों लटकाया गया है? क्या इसके पीछे कोई प्रशासनिक लापरवाही है या फिर भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है? सरकार और संबंधित विभागों को इस मामले की तुरंत जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, इस सड़क परियोजना को जल्द से जल्द शुरू कर जनता को राहत प्रदान करनी चाहिए।

Another instance of slow development and potential corruption has emerged in Bihar, where a 5 crore rupee road project remains confined to papers and an information board, with no ground work initiated. Locals are forced to endure treacherous journeys on pothole-ridden roads.

The situation is particularly dire for residents who commute daily on these broken and dusty paths. During the monsoon season, the potholes fill with water, significantly increasing the risk of accidents. Despite repeated appeals to officials and elected representatives, their grievances have gone unaddressed.

Villagers had hoped that the new road would improve connectivity and reduce travel time. However, the 5 crore project now appears to be a distant dream. This not only causes immense inconvenience to the public but also negatively impacts the region's economic development, affecting farmers transporting produce and small businesses.

This raises serious questions about the delay in such a significant project. Is it due to administrative negligence or corruption? The government and relevant departments must investigate this matter promptly, take strict action against those responsible, and expedite the road construction to alleviate public suffering.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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