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बजबजी गांव में पांच महीने से अधूरी पीएचईडी बोरिंग, ग्रामीण पानी के लिए परेशान

Bajna Baji Village Faces Water Crisis as PHED Boring Remains Incomplete for 5 Months

Dainik Bhaskar13 जुलाई 2026
बजबजी गांव5 महीने से

बक्सर जिले के बजबजी गांव के ग्रामीण पिछले पांच महीनों से पीने के पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) द्वारा शुरू की गई बोरिंग परियोजना अधूरी पड़ी है, जिसके कारण गांव के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि पीएचईडी विभाग ने पांच महीने पहले गांव में बोरिंग का काम शुरू किया था, लेकिन कुछ दिनों बाद ही इसे अधूरा छोड़ दिया गया। तब से लेकर अब तक यह काम दोबारा शुरू नहीं हो सका है। गांव में पहले से लगे चापाकल भी खराब पड़े हैं या सूख चुके हैं, जिससे स्थिति और भी विकट हो गई है। लोगों को दूर-दराज के इलाकों से पानी लाना पड़ रहा है, जिसमें उनका काफी समय और ऊर्जा व्यर्थ हो रही है। खासकर महिलाएं और बच्चे इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रशासन और पीएचईडी विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया है, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मांग की है कि बोरिंग का काम जल्द से जल्द पूरा कराया जाए और गांव में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे सड़क जाम कर प्रदर्शन करेंगे और संबंधित अधिकारियों का घेराव करेंगे।

इस समस्या के कारण गांव में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है, क्योंकि लोग स्वच्छ पानी के अभाव में दूषित पानी पीने को मजबूर हो सकते हैं। प्रशासन को इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देना चाहिए और ग्रामीणों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

Residents of Bajna Baji village in Buxar district have been grappling with a severe drinking water crisis for the past five months. A Public Health Engineering Department (PHED) boring project initiated in the village remains incomplete, leaving villagers to struggle for every drop of water.

According to locals, the PHED department commenced the boring work five months ago but abandoned it shortly after. Since then, the project has not resumed. Existing handpumps in the village are either out of order or have dried up, exacerbating the problem. Villagers are forced to fetch water from distant areas, wasting considerable time and energy. Women and children are particularly affected, facing daily struggles to access water for their needs.

Despite repeated appeals to local administration and PHED officials, no concrete action has been taken. Villagers are demanding the immediate completion of the boring work and the restoration of water supply. They have warned of protests, including road blockades and gheraos of officials, if their demands are not met. The lack of clean water also poses a health risk, as residents might resort to consuming contaminated water. The administration is urged to address this critical issue promptly and ensure access to safe drinking water for the villagers.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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