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बेगूसराय में डीएम ने हरित खाद उत्पादन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया

Begusarai DM Emphasizes Green Manure Production and Natural Farming

Dainik Bhaskar13 जुलाई 2026

बेगूसराय के ज़िलाधिकारी (डीएम) ने हाल ही में ज़िले में हरित खाद के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों को हरित खाद बनाने और उसका उपयोग करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने ज़ोर दिया कि रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करके जैविक और प्राकृतिक तरीकों को अपनाना समय की मांग है।

ज़िलाधिकारी ने बताया कि हरित खाद मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह मिट्टी की संरचना में सुधार करती है, जल धारण क्षमता बढ़ाती है और आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती है। इससे न केवल फ़सलों की पैदावार बढ़ती है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल रासायनिक मुक्त खेती नहीं है, बल्कि यह मिट्टी, पानी और जैव विविधता के संरक्षण पर भी ध्यान केंद्रित करती है। इससे पर्यावरण को भी लाभ होता है और उपभोक्ताओं को स्वस्थ उत्पाद मिलते हैं।

डीएम ने कृषि विभाग के अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों को निर्देश दिया कि वे किसानों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करें। इन कार्यक्रमों में किसानों को हरित खाद बनाने की विधि, विभिन्न प्रकार की हरित खाद वाली फ़सलें (जैसे ढैंचा, सनई, मूंग, उड़द) और उनके लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर किसान प्राकृतिक खेती को अपना सकते हैं और अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं।

इस पहल का उद्देश्य बेगूसराय ज़िले को एक कृषि-आधारित आत्मनिर्भर ज़िला बनाना है, जहाँ किसान आधुनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर समृद्धि प्राप्त कर सकें। डीएम ने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर हरित खाद के उत्पादन से किसानों को बाहर से खाद खरीदने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनकी लागत में कमी आएगी और शुद्ध मुनाफ़ा बढ़ेगा। यह कदम ज़िले में कृषि विकास के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान करता है।

The District Magistrate (DM) of Begusarai recently underscored the importance of promoting the production and use of green manure in the district. He stated that encouraging natural farming practices will strengthen the rural economy and significantly boost farmers' incomes. The DM instructed officials to motivate farmers to produce and utilize green manure, emphasizing that reducing reliance on chemical fertilizers and adopting organic and natural methods is crucial for sustainable agriculture.

He highlighted that green manure plays a vital role in enhancing soil fertility, improving soil structure, increasing water retention capacity, and providing essential nutrients. This not only boosts crop yields but also improves their quality. The DM explained that natural farming is not just about chemical-free agriculture but also focuses on conserving soil, water, and biodiversity, benefiting the environment and providing healthier produce to consumers.

The DM directed agricultural department officials and scientists to organize workshops and training programs to raise awareness among farmers. These programs will educate farmers on green manure production methods, various green manure crops (such as Dhaincha, Sunn hemp, Moong, Urad), and their benefits. He urged farmers to leverage various government schemes to adopt natural farming and double their income.

This initiative aims to transform Begusarai into an agriculture-based self-reliant district where farmers can achieve prosperity by adopting modern and sustainable agricultural practices. The DM also noted that local production of green manure would eliminate the need for farmers to purchase fertilizers from outside, thereby reducing costs and increasing net profits. This step provides a crucial direction for agricultural development in the district.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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