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पटना से 50 KM दूर घांघ गांव की सड़क बदहाल, एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती

Dilapidated Road in Ghangh Village, Patna: Residents Suffer, Ambulances Cannot Reach

Dainik Bhaskar14 जुलाई 2026
घांघ गांव

पटना से मात्र 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित घांघ गांव के ग्रामीणों को अपनी बदहाल सड़क के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह गांव राजधानी के इतने करीब होने के बावजूद विकास की दौड़ में पिछड़ा हुआ प्रतीत होता है। गांव की मुख्य सड़क इतनी जर्जर हो चुकी है कि वहां से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे और धूल-मिट्टी के ढेर लगे हुए हैं, जिससे पैदल चलना भी दूभर हो गया है, खासकर बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। सबसे गंभीर समस्या यह है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस या अन्य कोई वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता। बीमारियों और प्रसव पीड़ा से जूझ रहे मरीजों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए खाट या ठेले का सहारा लेना पड़ता है, जो उनके जीवन के लिए एक बड़ा खतरा बन जाता है। कई बार तो अस्पताल पहुंचने में देरी के कारण मरीजों की जान पर बन आती है।

स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की गुहार लगाई है, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। ग्रामीणों में सरकार और स्थानीय प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि वे वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे हैं और उन्हें अब तक कोई समाधान नहीं मिला है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस बदहाल सड़क के कारण घांघ गांव के बच्चे भी स्कूल जाने में कठिनाई महसूस करते हैं, और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भी दिक्कत होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ रहा है। यह स्थिति सरकार के 'सबका साथ, सबका विकास' के दावों पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

Residents of Ghangh village, located just 50 kilometers from Patna, are facing severe hardships due to the dilapidated condition of their main road. Despite its proximity to the state capital, the village appears to be lagging in terms of development. The road is riddled with large potholes and heaps of dust, making even walking a challenge, especially during the monsoon season when conditions worsen significantly.

Villagers report frequent accidents due to the poor road quality. A major concern is the inability of ambulances and other vehicles to reach the village during emergencies. Patients suffering from illnesses or labor pains must be carried on cots or handcarts to the main road, posing a significant risk to their lives. Delays in reaching hospitals have, at times, proven fatal.

Local residents have repeatedly appealed to the administration and public representatives for road construction, but their pleas have gone unheeded. There is widespread anger among the villagers towards the government and local administration, as they have been grappling with this issue for years without a resolution. They have warned of protests if the road is not repaired soon. This poor infrastructure also impacts children's access to school and farmers' ability to transport produce to markets, negatively affecting their economic well-being and raising questions about the government's development claims.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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