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गोपालगंज सदर अस्पताल जलमग्न: 38 करोड़ का मॉडल अस्पताल बारिश में बना तालाब, मरीजों को गोद में उठाकर ले जाना पड़ा

Gopalganj Sadar Hospital Submerged: Rs 38 Crore Model Hospital Turns into Pond After Rain, Patients Carried in Arms

Dainik Bhaskar13 जुलाई 2026
सदर अस्पतालशनिवार

गोपालगंज सदर अस्पताल, जिसे 38 करोड़ रुपये की लागत से एक मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित किया गया था, मॉनसून की पहली बारिश में ही तालाब में तब्दील हो गया है। अस्पताल परिसर और वार्डों में पानी भर जाने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के प्रवेश द्वार से लेकर इमरजेंसी वार्ड और अन्य विभागों तक घुटनों तक पानी जमा हो गया है।

शनिवार को हुई भारी बारिश के बाद अस्पताल की यह बदहाली सामने आई। अस्पताल में जलजमाव की स्थिति ऐसी है कि मरीजों को स्ट्रेचर के बजाय गोद में उठाकर या कंधों पर लादकर एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाना पड़ रहा है। कई मरीजों को तो पानी से होकर ही बेड तक पहुंचना पड़ा। इस स्थिति से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ा है। ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में कमी आई है और जो मरीज आ रहे हैं, उन्हें भीगते हुए या पानी से गुजरते हुए इलाज कराना पड़ रहा है।

अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि 38 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद जल निकासी की उचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई। यह पहली बार नहीं है जब गोपालगंज सदर अस्पताल में जलजमाव की समस्या हुई हो। हर साल बारिश के मौसम में ऐसी ही स्थिति देखने को मिलती है, जिससे मरीजों और कर्मचारियों दोनों को परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल निर्माण के दौरान जल निकासी की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसका खामियाजा अब सबको भुगतना पड़ रहा है।

इस मामले में सिविल सर्जन और अस्पताल उपाधीक्षक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। जलजमाव के कारण संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे अस्पताल में भर्ती मरीजों की सेहत पर और बुरा असर पड़ सकता है।

Gopalganj Sadar Hospital, developed as a model hospital with an investment of 38 crore rupees, has been submerged, turning into a pond after the first monsoon rains. The hospital premises and wards are waterlogged, causing immense difficulties for patients and their families. Water up to knee-level has accumulated from the hospital entrance to the emergency ward and other departments.

This deplorable condition of the hospital came to light after heavy rainfall on Saturday. The waterlogging is so severe that patients have to be carried in arms or on shoulders instead of stretchers to move between wards. Many patients had to wade through water to reach their beds. This situation has also adversely affected the hospital's health services. The number of patients visiting the OPD has decreased, and those who do come have to endure the rain or waterlogging for treatment.

Questions are being raised about why proper drainage systems were not implemented despite the 38 crore rupee expenditure. This is not the first time Gopalganj Sadar Hospital has faced waterlogging issues. Every year during the monsoon, similar situations arise, troubling both patients and staff. Locals suggest that drainage problems were not taken seriously during the hospital's construction, and now everyone is paying the price.

Attempts to contact the Civil Surgeon and Hospital Deputy Superintendent for comment were unsuccessful, with no satisfactory response received. Patients and their families have appealed to the government and the health department to find a permanent solution to this serious problem to prevent similar situations in the future and ensure better healthcare services. The waterlogging also increases the risk of infection, which could further negatively impact the health of hospitalized patients.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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विकास

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