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जन संस्कृति मंच का 41वां स्थापना दिवस मनाया गया, 'प्रतिरोध का सिनेमा' के तहत फिल्म का प्रदर्शन

Jan Sanskriti Manch Celebrates 41st Foundation Day, 'Cinema of Resistance' Film Screened

Dainik Bhaskar26 अक्टूबर 2026
आरा

आरा | जन संस्कृति मंच (जसम) ने अपना 41वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर 'प्रतिरोध का सिनेमा' के तहत 'थोड़ा सा रूमानी हो जाएं' नामक फिल्म का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुमन कुमार सिंह ने किया, जिन्होंने बताया कि पिछले चार दशकों से जसम देश भर में आम लोगों की संस्कृति को समृद्ध करने और सांस्कृतिक अराजकता के खिलाफ जन संस्कृति को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

जसम, बिहार के अध्यक्ष सह कवि-आलोचक जितेंद्र कुमार ने बताया कि जन संस्कृति मंच की स्थापना 26 अक्टूबर 1985 को क्रांतिकारी राजनीतिक चेतना और सांस्कृतिक अंतर्विरोधों से निपटने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने सत्ता के खिलाफ जन संस्कृति के पक्ष में एक मजबूत प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर उपस्थित संस्कृति कर्मियों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी और प्रतिरोध की आवाज को मुखर करने का संकल्प लिया।

समारोह में अध्यक्ष जितेंद्र कुमार, शमशाद प्रेम, अरुण प्रसाद, इश्तेयाक अहमद, कवि जनार्दन मिश्र, पिंटू पुष्कर, अमित मेहता, सूर्यप्रकाश, सुधांशु रंजन, सीताराम रवि, डॉ. नथुनी पाण्डेय, डॉ. सिद्धनाथ सागर, विक्रांत और सुमन कुमार सिंह सहित कई प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

Arrah | Jan Sanskriti Manch (JSM) recently celebrated its 41st Foundation Day with enthusiasm. As part of the 'Cinema of Resistance' initiative, the film 'Thoda Sa Rumani Ho Jayen' was screened during the event. Suman Kumar Singh, who conducted the program, highlighted JSM's significant role over the past four decades in enriching public culture across the country and fostering a people's culture against cultural anarchy.

Jitendra Kumar, President of JSM, Bihar, and a renowned poet-critic, informed that Jan Sanskriti Manch was established on October 26, 1985, with the aim of addressing revolutionary political consciousness and cultural contradictions. He reiterated the organization's commitment to acting as a strong opposition in favor of people's culture against the ruling powers. Attendees observed a two-minute silence to pay tribute and pledged to amplify the voice of resistance.

The ceremony saw the presence of numerous intellectuals and cultural figures, including President Jitendra Kumar, Shamshad Prem, Arun Prasad, Ishteyaq Ahmed, poet Janardan Mishra, Pintu Pushkar, Amit Mehta, Suryaprakash, Sudhanshu Ranjan, Sitaram Ravi, Dr. Nathuni Pandey, Dr. Siddhnath Sagar, Vikrant, and Suman Kumar Singh.

hamarazila.in डेस्क · AI-सहायता से तैयार · संपादकीय नीति

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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