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मोकामा में बढ़ा सांपों का आतंक, स्थानीय रेस्क्यू टीम न होने से लोग दहशत में

Mokama Residents Terrified as Snake Menace Rises, Lacking Local Rescue Team

Dainik Bhaskar14 जुलाई 2026
मोकामागंगा नदी

मोकामा: गंगा नदी के किनारे बसे मोकामा क्षेत्र में इन दिनों सांपों का आतंक बढ़ गया है। यहां के ग्रामीण इलाकों में, खासकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में, सांपों के लगातार दिखने से लोगों में दहशत का माहौल है। स्थिति यह है कि स्थानीय स्तर पर सांपों को पकड़ने या रेस्क्यू करने वाली कोई प्रशिक्षित टीम नहीं है, जिसके कारण हर छोटे-बड़े मामले में पटना से विशेषज्ञों को बुलाना पड़ता है।

बरसात के मौसम में, जब गंगा नदी का जलस्तर बढ़ता है और पानी निचले इलाकों में फैलता है, तब सांप सुरक्षित ठिकानों की तलाश में घरों और रिहायशी इलाकों की ओर रुख करते हैं। इस साल भी यही स्थिति है, जिससे सर्पदंश के मामलों में वृद्धि की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी किसी घर में सांप घुस आता है या किसी को सांप काट लेता है, तो उन्हें तुरंत पटना स्थित वन विभाग या सर्प विशेषज्ञों से संपर्क करना पड़ता है। इसमें समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी होती है, और कई बार समय पर मदद न मिलने के कारण स्थिति गंभीर हो जाती है।

मोकामा के कई निवासियों ने बताया कि सांपों को देखते ही बच्चे और महिलाएं डर जाते हैं। घरों के अंदर, खेतों में और यहां तक कि सड़कों पर भी सांपों का दिखना आम हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मोकामा में एक स्थानीय सर्प रेस्क्यू टीम का गठन किया जाए, जिसे प्रशिक्षित कर्मियों से लैस किया जाए। इससे न केवल लोगों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि सांपों को भी बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जा सकेगा। स्थानीय टीम होने से त्वरित कार्रवाई संभव होगी और पटना पर निर्भरता कम होगी, जिससे लोगों को समय पर राहत मिल सकेगी।

Mokama, a town situated along the Ganga River, is currently experiencing a significant increase in snake sightings, causing widespread panic among residents. The situation is particularly dire in rural and flood-prone areas, where the absence of a local, trained snake rescue team forces residents to rely on experts from Patna for every incident.

During the monsoon season, as the Ganga's water levels rise and inundate lower-lying areas, snakes seek refuge in homes and residential zones. This year is no exception, raising concerns about a potential surge in snakebite incidents. Locals report that whenever a snake enters a home or someone is bitten, they must contact the forest department or snake specialists in Patna. This process is time-consuming and resource-intensive, and delays in assistance often exacerbate the situation.

Mokama residents are demanding that the administration establish a local snake rescue team, equipped with trained personnel. Such a team would not only save lives but also ensure the safe relocation of snakes without harm. A local team would enable quicker responses, reduce reliance on Patna, and provide timely relief to the fearful community.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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स्वास्थ्यविकास

बच्चों के शरीर में मिल रहे हैं प्लास्टिक के अंश: एक गंभीर चेतावनी

हाल के अध्ययनों से पता चला है कि बच्चों के शरीर में मिट्टी, पानी और हवा के माध्यम से प्लास्टिक के छोटे-छोटे कण (माइक्रोप्लास्टिक्स) प्रवेश कर रहे हैं। यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करती है। प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग और उसका अनुचित निपटान इस समस्या का मुख्य कारण है। ये कण हमारी आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन वे पर्यावरण में व्यापक रूप से फैल चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोप्लास्टिक्स हार्मोनल असंतुलन, पाचन संबंधी समस्याओं और विकास संबंधी विकारों का कारण बन सकते हैं। बच्चों का कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र उन्हें इन प्रदूषकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए प्लास्टिक के उपयोग को कम करना, कचरे का उचित प्रबंधन करना और जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।

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