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सहरसा में कोसी तटबंध के भीतर 7 पंचायतें फंसीं, ग्रामीणों को निजी नावों पर ₹100 किराया चुकाना पड़ रहा

7 Panchayats Trapped Inside Kosi Embankment in Saharsa, Villagers Pay ₹100 for Private Boats

Dainik Bhaskar12 जुलाई 2026
कोसी तटबंध

सहरसा जिले में कोसी नदी के तटबंध के भीतर स्थित सात पंचायतें इस समय बाढ़ के पानी से घिरी हुई हैं। इन पंचायतों के हजारों ग्रामीण सरकारी नावों की कमी के कारण भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इन क्षेत्रों में आवागमन के लिए सरकारी नावों की व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीणों को निजी नाव संचालकों को प्रति व्यक्ति 50 से 100 रुपये तक का किराया चुकाना पड़ रहा है।

कोसी तटबंध के भीतर बसे इन गांवों के लोगों के लिए मुख्यधारा से जुड़ने का एकमात्र साधन नाव ही है। खासकर, जब बाढ़ का पानी बढ़ता है, तो यह समस्या और गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे उन्हें हर रोज अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और दैनिक जरूरतों के सामान लाने के लिए भी उन्हें निजी नावों पर निर्भर रहना पड़ता है।

इस स्थिति से न केवल आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच भी बाधित हो रही है। ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सरकारी नावों की व्यवस्था करने की गुहार लगाई है, लेकिन उनकी शिकायतें अनसुनी की जा रही हैं। यह समस्या हर साल बाढ़ के मौसम में उत्पन्न होती है, फिर भी इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।

प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल इन प्रभावित पंचायतों में पर्याप्त संख्या में सरकारी नावों की व्यवस्था करे, ताकि ग्रामीणों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति मिल सके और उनकी आवागमन की समस्या का समाधान हो सके। यह मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत आवश्यक है कि संकट की इस घड़ी में लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

Seven panchayats located within the Kosi river embankment in Saharsa district are currently surrounded by floodwaters. Thousands of villagers in these panchayats are facing severe difficulties due to the lack of government boats. According to reports, as there is no provision for government boats for transportation in these areas, villagers are forced to pay private boat operators a fare of up to ₹50 to ₹100 per person.

For the people living in these villages inside the Kosi embankment, boats are the only means of connecting to the mainstream. Especially when floodwaters rise, this problem becomes even more severe. Local residents state that no concrete steps are being taken by the administration, forcing them to spend money daily. They have to rely on private boats even for children to go to school, patients to reach hospitals, and to fetch daily necessities.

This situation is not only increasing the economic burden but also obstructing access to emergency services. Villagers have repeatedly appealed to the local administration and elected representatives to arrange government boats, but their complaints are going unheard. This problem arises every year during the flood season, yet a permanent solution has not been found. The administration should immediately arrange an adequate number of government boats in these affected panchayats to relieve the villagers of unnecessary financial burden and solve their transportation problems.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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स्वास्थ्यराजनीति

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