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तरैया में जलजमाव: व्यवसाय ठप, जनता बेहाल, डेढ़ फीट पानी में डूबी सड़कें

Waterlogging in Taraiya: Businesses Crippled, Public Suffering as Roads Submerged Under 1.5 Feet of Water

Prabhat Khabar19 जुलाई 2026
तरैयाप्रखंड: तरैयागंडक नहर पुल, मुरलीपुर गंडक नहर पुलपिछले कई महीनों से

सारण: तरैया प्रखंड मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कई महीनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण मुख्य सड़कों पर भारी जलजमाव हो गया है. प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की घोर उदासीनता से आम जनता और व्यवसायियों को नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. इस गंभीर समस्या की ओर न तो विभाग के पदाधिकारी ध्यान दे रहे हैं और न ही जनता के प्रतिनिधि, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है.

तरैया गंडक नहर पुल से लगभग 500 गज की दूरी तक मुख्य सड़क पर करीब डेढ़ फीट तक बारिश का पानी जमा हुआ है. जलजमाव का मुख्य कारण ड्रेनेज सिस्टम का पूरी तरह ध्वस्त होना है. सड़क के एक तरफ का नाला बंद है, जबकि दूसरी तरफ का वर्षों पुराना नाला जर्जर स्थिति में है, जिससे पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है. राहगीरों का पैदल चलना दुश्वार हो गया है और सड़क किनारे बसे लोगों का अपने घरों से निकलना मुश्किल हो गया है.

महीनों से जलजमाव के कारण स्थानीय दुकानदारों का व्यवसाय पूरी तरह ठप पड़ गया है. कपड़ा के होलसेल व्यवसाय, साइकिल मरम्मत, बाइक पार्ट्स व बाइक मिस्त्री, और खैनी दुकान समेत अन्य प्रभावित दुकानदारों ने बताया कि दुकानों के ठीक आगे सड़क पर पानी जमा होने के कारण ग्राहक उनके प्रतिष्ठानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. व्यापार बंद होने से उनके सामने आर्थिक संकट और भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है.

ग्रामीणों और व्यवसायियों की शिकायत पर पूर्व में पथ निर्माण विभाग के पदाधिकारियों द्वारा मुरलीपुर गंडक नहर पुल के पास नाले की निकासी की गई थी, जिससे सड़कों पर जमा पानी उतर गया था. लेकिन अगले ही दिन गंडक नहर विभाग के पदाधिकारियों ने नहर में नाले का पानी गिराने को गलत बताते हुए सैंड बैग से उस निकासी मार्ग को दोबारा बंद कर दिया. विभागों की इस आपसी खींचतान का खामियाजा अब आम जनता भुगत रही है.

तरैया-अमनौर मार्ग की स्थिति तो और भी भयावह हो चुकी है. इस सड़क पर इतना पानी और कीचड़ जमा है कि लोगों ने इस रास्ते से आना-जाना छोड़ दिया है. सड़क के किनारे भी पैदल चलने की जगह नहीं बची है. बारिश का गंदा पानी सड़कों से ओवरफ्लो होकर लोगों के घरों और दुकानों के भीतर तक घुस गया है. स्थानीय जनता यह सवाल पूछने को मजबूर है कि आखिर तरैयावासियों को इस नारकीय जलजमाव से कब और कैसे निजात मिलेगी.

Heavy waterlogging has severely impacted Taraiya block headquarters and surrounding areas in Saran district due to intermittent rainfall over the past few months. Both the general public and local businesses are enduring dire conditions, attributed to the profound indifference of the administration and elected representatives. Roads, particularly near the Taraiya Gandak Canal Bridge, are submerged under approximately 1.5 feet of water, making pedestrian movement extremely difficult and restricting residents' access to their homes.

The primary cause of the waterlogging is a completely dysfunctional drainage system. One side of the road's drain is entirely blocked, while the other, an old structure, is in dilapidated condition, leaving no outlet for the accumulated water. Local shopkeepers, including wholesale cloth merchants, bicycle repair shops, bike parts dealers, and tobacco vendors, report a complete halt in business. Customers are unable to reach their establishments due to the submerged roads, leading to severe economic hardship and fear of starvation among traders.

Previously, officials from the Road Construction Department had cleared the drainage near the Murlipur Gandak Canal Bridge, alleviating the waterlogging. However, the very next day, officials from the Gandak Canal Department closed the outlet again with sandbags, citing that draining water into the canal was incorrect. This inter-departmental conflict has left the public to suffer the consequences.

The situation on the Taraiya-Amanour road is even worse, with so much water and mud that people have abandoned using it. There's no space for pedestrians, and rainwater has overflowed into homes and shops. Residents are now demanding answers on when and how they will be freed from this deplorable situation.

स्रोत: Prabhat Khabar की रिपोर्ट के आधार पर

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