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स्थानांतरण के बाद भी बोचहां अंचलाधिकारी ने बिना सुनवाई किया दाखिल-खारिज

Transferred Bochahan Circle Officer Processed Mutation Without Hearing

Dainik Bhaskar10 जुलाई 2026
प्रखंड: बोचहां

मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां अंचल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ अंचलाधिकारी (CO) का तबादला हो जाने के बावजूद उन्होंने बिना किसी सुनवाई के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के मामले को निपटा दिया। यह घटना तब हुई जब बोचहां अंचल के अंचलाधिकारी का स्थानांतरण हो चुका था और वे पद से मुक्त हो चुके थे। इसके बावजूद, उन्होंने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य को अंजाम दिया, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

दाखिल-खारिज एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें भूमि के स्वामित्व में परिवर्तन को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है। इस प्रक्रिया में आमतौर पर संबंधित पक्षों की सुनवाई आवश्यक होती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी दावे सही हैं और कोई विवाद नहीं है। बिना सुनवाई के दाखिल-खारिज करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है और इससे भविष्य में भूमि विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।

इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लापरवाही और नियमों की अनदेखी किस हद तक हो रही है। एक अधिकारी के तबादले के बाद भी उनके द्वारा आधिकारिक कार्यों का निष्पादन करना न केवल अनैतिक है बल्कि कानूनी रूप से भी संदिग्ध है। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और यह मांग की जा रही है कि इस मामले की गहन जाँच की जाए।

स्थानीय ग्रामीणों और हितधारकों ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की मनमानी से आम लोगों का सरकारी तंत्र पर से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और सभी प्रशासनिक कार्य निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही किए जाएँ।

A startling case has emerged from the Bochahan circle in Muzaffarpur district, where a Circle Officer (CO) allegedly processed a mutation (Dakhil-Kharij) case without conducting any hearing, despite having been transferred from the post. This incident raises serious questions about the transparency and legality of administrative procedures.

Mutation is a crucial process for recording changes in land ownership in government records, typically requiring a hearing for all parties involved to ensure the validity of claims and prevent disputes. Processing a mutation without a hearing is a violation of established norms and can lead to future land conflicts. The fact that a transferred officer, who was no longer officially in charge, carried out such a significant administrative task highlights serious lapses in the system.

Local residents and stakeholders have expressed strong objections, asserting that such arbitrary actions erode public trust in government machinery. They have urged the district administration to intervene, investigate the matter thoroughly, and take strict action against the concerned officer. There is also a demand to ensure that such incidents are not repeated and that all administrative tasks are conducted strictly according to established rules and procedures in the future.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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