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विनोदपुर पंचायत: गो-शेड का दुरुपयोग, पशुओं की जगह रखा जा रहा जलावन

Vinodpur Panchayat: Cow Sheds Misused for Firewood Storage, Not Cattle

Dainik Bhaskar4 जुलाई 2026
पंचायत: बिनोदपुर

बिहार के विनोदपुर पंचायत में गो-शेड योजना के तहत बने पशु शेडों का दुरुपयोग सामने आया है। सरकार द्वारा पशुपालकों को सुविधा देने और पशुधन के बेहतर प्रबंधन के लिए बनाए गए इन शेडों में पशुओं की जगह जलावन (लकड़ी) रखी जा रही है। यह स्थिति योजना के मूल उद्देश्य को विफल कर रही है और उन पशुपालकों के लिए चिंता का विषय है जो वास्तव में इस सुविधा का लाभ उठाना चाहते हैं।

ग्रामीणों और स्थानीय स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, विनोदपुर पंचायत में कई लाभार्थी ऐसे हैं जिन्होंने गो-शेड का निर्माण तो करा लिया है, लेकिन उसका उपयोग अपने पशुओं को रखने के बजाय घरेलू सामान, विशेषकर जलावन, को स्टोर करने के लिए कर रहे हैं। इससे एक तरफ जहां सरकारी धन का अपव्यय हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ पशुओं को खुले में रखने की मजबूरी बनी हुई है, जिससे उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

गो-शेड योजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को स्वच्छ और सुरक्षित स्थान प्रदान करना है ताकि उनके पशुधन का सही ढंग से पालन-पोषण हो सके। इससे दूध उत्पादन में वृद्धि और पशुओं से संबंधित बीमारियों में कमी आने की उम्मीद की जाती है। हालांकि, विनोदपुर में सामने आई यह तस्वीर बताती है कि योजना के क्रियान्वयन में निगरानी की कमी है।

स्थानीय प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों को इस मामले पर ध्यान देने की आवश्यकता है। लाभार्थियों को योजना के सही उपयोग के बारे में जागरूक करना और नियमित अंतराल पर गो-शेडों का निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि गो-शेड अपने मूल उद्देश्य की पूर्ति करें और वास्तविक पशुपालकों को इसका लाभ मिले, न कि इसका दुरुपयोग निजी भंडारण के लिए हो। यदि इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो यह योजना अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहेगी और सरकारी संसाधनों का अनुचित उपयोग जारी रहेगा।

A concerning misuse of government-funded cow sheds has come to light in Vinodpur Panchayat, Bihar. These sheds, constructed under the 'Go-Shed Yojana' to provide better facilities for livestock and their owners, are reportedly being used to store firewood rather than cattle. This practice defeats the primary objective of the scheme and raises questions about the effective utilization of public funds.

According to local reports and villagers, several beneficiaries in Vinodpur Panchayat who have received these cow sheds are converting them into personal storage spaces, primarily for firewood. This not only represents a wastage of government resources but also leaves the actual livestock exposed to the elements, impacting their health and safety. The 'Go-Shed Yojana' aims to offer clean and safe shelters for cattle in rural areas, thereby improving animal husbandry practices, increasing milk production, and reducing animal diseases. The current situation in Vinodpur highlights a significant lack of oversight in the implementation of the scheme.

Local administration and panchayat representatives are urged to address this issue promptly. It is crucial to educate beneficiaries about the intended use of the sheds and conduct regular inspections to ensure compliance. Ensuring that these cow sheds serve their original purpose and benefit genuine cattle owners is vital to prevent further misuse of government funds and achieve the scheme's goals.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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