कतरनी चावल
Katarni Rice
GI टैग 2018कृषि उत्पाद
कतरनी भागलपुर और बांका क्षेत्र का पारंपरिक सुगंधित धान है। इसकी प्रसिद्धि भात से ज़्यादा चूड़ा और खीर से है — कतरनी का चूड़ा बिहार में अलग दर्जा रखता है, और खीर में इसकी सुगंध पकने के बाद भी बनी रहती है। इसे 2018 में GI टैग मिला।
खासियत क्या है
- सुगंध इसकी मुख्य पहचान है, जो पकाने पर पूरे घर में फैलती है।
- दाना छोटा और मुलायम होता है, जिससे चूड़ा कूटने पर वह नरम बनता है।
- खीर में यह चावल जल्दी घुलकर गाढ़ापन देता है।
- यह पारंपरिक, कम उपज वाली किस्म है — इसलिए सामान्य चावल से महँगी रहती है।
कैसे बनता है
- यह खरीफ़ की फसल है, जो वर्षा पर निर्भर रहती है।
- कटाई के बाद धान को सुखाकर कूटा या मिल किया जाता है; चूड़े के लिए प्रक्रिया अलग होती है।
- चूड़ा बनाने में धान को भिगोकर, भूनकर कूटा जाता है — यही उसे नरम बनाता है।
कहाँ से आता है
- भागलपुर और बांका ज़िले इसका GI क्षेत्र हैं।
- क्षेत्र के कुछ प्रखंड पारंपरिक रूप से कतरनी के लिए जाने जाते हैं, जहाँ यह पीढ़ियों से बोई जाती है।
खरीदते समय क्या देखें
- सुगंध जाँचें — कतरनी की पहचान गंध से होती है, दिखने से नहीं।
- मिश्रित चावल आम समस्या है; भरोसेमंद विक्रेता या किसान से सीधी खरीद ठीक रहती है।
- चूड़ा खरीदते समय देखें कि वह नरम हो और मुँह में दबते ही टूटे।
- नई फसल के बाद, प्रायः सर्दियों में, गुणवत्ता सबसे अच्छी रहती है।
GI क्षेत्र के ज़िले
सामान्य प्रश्न
कतरनी चावल क्या है?
भागलपुर-बांका क्षेत्र का पारंपरिक सुगंधित धान, जो चूड़ा और खीर के लिए प्रसिद्ध है।
कतरनी चावल को GI टैग कब मिला?
2018 में।
कतरनी चावल कहाँ होता है?
भागलपुर और बांका ज़िलों में।
कतरनी किस काम में सबसे अच्छी मानी जाती है?
चूड़ा और खीर — दोनों में इसकी सुगंध और नरमी इसकी पहचान है।
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अंतिम अपडेट: 2026-10