मर्चा चावल, पश्चिमी चंपारण
Marcha Rice
GI टैग 2024कृषि उत्पाद
मर्चा पश्चिमी चंपारण का पारंपरिक सुगंधित धान है, और इसका नाम इसके दाने के आकार से आया है — दाना मिर्च जैसा दिखता है। इसकी प्रसिद्धि चूड़े के लिए है: मर्चा का चूड़ा सुगंधित और नरम होता है, और चंपारण क्षेत्र में इसे विशेष दर्जा मिला हुआ है। यह बिहार के नए GI उत्पादों में है, जिसे 2024 में पंजीकरण मिला।
खासियत क्या है
- दाने का मिर्च जैसा आकार इसकी सबसे पहचानी विशेषता है।
- सुगंध पकाने और चूड़ा कूटने — दोनों के बाद बनी रहती है।
- चूड़े के लिए इसे क्षेत्र में सबसे उपयुक्त किस्म माना जाता है।
- यह पारंपरिक किस्म है, जिसकी खेती सीमित क्षेत्र में होती है।
कैसे बनता है
- यह खरीफ़ की फसल है, जो मानसून पर निर्भर रहती है।
- कटाई के बाद धान सुखाया जाता है; चूड़े के लिए उसे भिगोकर, भूनकर कूटा जाता है।
- चूड़े की नरमी इसी भिगोने-भूनने के संतुलन पर निर्भर करती है।
कहाँ से आता है
- पश्चिमी चंपारण ज़िला — यही इसका GI क्षेत्र है।
- क्षेत्र के पारंपरिक धान क्षेत्रों में यह पीढ़ियों से बोई जाती रही है।
खरीदते समय क्या देखें
- सुगंध और दाने का आकार — दोनों देखें; मर्चा का दाना पहचान में आ जाता है।
- चूड़ा नरम हो और दबाने पर टूटे, कड़ा न लगे।
- नई फसल के मौसम में गुणवत्ता सबसे अच्छी रहती है।
- चंपारण क्षेत्र के बाज़ार या किसान से सीधी खरीद अधिक भरोसेमंद रहती है।
GI क्षेत्र के ज़िले
सामान्य प्रश्न
मर्चा चावल क्या है?
पश्चिमी चंपारण का पारंपरिक सुगंधित धान, जिसका दाना मिर्च जैसा दिखता है और जो चूड़े के लिए प्रसिद्ध है।
मर्चा चावल को GI टैग कब मिला?
2024 में।
मर्चा चावल कहाँ होता है?
पश्चिमी चंपारण ज़िले में।
मर्चा का नाम कैसे पड़ा?
इसके दाने का आकार मिर्च जैसा होने के कारण।
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अंतिम अपडेट: 2026-10