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पिता के सपनों को बनाया संकल्प, B.Ed टॉपर बक्सर की अक्षरा सिंह बनीं शिक्षिका; अब IAS बनने का लक्ष्य

Buxar's Akshara Singh, B.Ed Topper, Becomes Teacher Fulfilling Father's Dream; Aims for IAS Now

Jagran31 अक्टूबर 2026
छठिया पोखराप्रखंड: डुमरांव

बक्सर जिले के डुमरांव की अक्षरा सिंह ने बीएड में टॉप कर सरकारी शिक्षिका बनकर अपने पिता का सपना पूरा किया है। अक्षरा सिंह ने सभापति मिश्रा इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में बीएड में पूरे संस्थान में प्रथम स्थान प्राप्त किया। अब उनका अगला लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित होकर समाज के लिए व्यापक स्तर पर योगदान देना है।

डुमरांव के छठिया पोखरा निवासी अक्षरा सिंह ने अपनी शैक्षणिक यात्रा के दौरान दसवीं में विद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया था। इंटरमीडिएट और स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बीएड में दाखिला लिया। दो वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण से उन्होंने पूरे संस्थान में टॉप किया और आज वह उच्च माध्यमिक विद्यालय मधेपुरा में विज्ञान शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं, विद्यार्थियों का भविष्य संवार रही हैं।

अक्षरा सिंह अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने दिवंगत पिता डॉ. बालेश्वर सिंह को देती हैं। उनके पिता द्वारा दिए गए संस्कार, अनुशासन, प्रेरणा और शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच ने अक्षरा को हर चुनौती से लड़ने की ताकत दी। पिता भले ही आज उनके बीच नहीं हैं, लेकिन उनके सपने और सीख अक्षरा के जीवन का मार्गदर्शन कर रहे हैं। वह अपनी प्रत्येक उपलब्धि पिता को समर्पित करती हैं।

बीएड संस्थान के प्रेसिडेंट चंदन कुमार मिश्र के मार्गदर्शन ने भी अक्षरा के व्यक्तित्व और शैक्षणिक सोच को नई दिशा दी। उनका मानना है कि शिक्षा केवल सूचनाओं और डिग्रियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ज्ञान का व्यवहार में उपयोग ही उसे सार्थक बनाता है। दीपावली पर दैनिक जागरण के विशेष अभियान 'लक्ष्मी मेरी लाडो' के तहत अक्षरा की कहानी यह संदेश देती है कि बेटियों को विश्वास और अवसर मिले तो वे अपने परिवार के सपनों को ही नहीं, समाज की उम्मीदों को भी नई उड़ान दे सकती हैं।

Akshara Singh, a resident of Dumraon in Buxar district, has fulfilled her late father's dream by becoming a government teacher after topping her B.Ed course. She secured the first position in the entire institution at Sabhapati Mishra Institute of Education. Now, her next goal is to qualify for the Indian Administrative Service (IAS) and contribute to society on a broader level.

Akshara, who lives near Chhathiya Pokhra in Dumraon, had consistently excelled academically, topping her school in the tenth grade. After completing her intermediate and graduation, she enrolled in the B.Ed program. Through two years of hard work and dedication, she emerged as the topper of her institute. Currently, she works as a science teacher at a higher secondary school in Madhepura, shaping the future of her students.

Akshara attributes her success primarily to her late father, Dr. Baleshwar Singh. His values, discipline, inspiration, and positive outlook towards education empowered her to overcome every challenge. Though her father is no longer with her, his dreams and teachings continue to guide her life. She dedicates every achievement to him.

The guidance from चंदन कुमार मिश्र, President of the B.Ed institute, also played a crucial role in shaping Akshara's personality and educational philosophy. He believes that education should not be limited to information and degrees but should involve the practical application of knowledge to be meaningful. Akshara's story, highlighted under Dainik Jagran's special campaign 'Lakshmi Meri Lado' during Diwali, conveys a powerful message: when daughters are given trust and opportunities, they can not only fulfill their family's dreams but also elevate society's aspirations.

hamarazila.in डेस्क · AI-सहायता से तैयार · संपादकीय नीति

स्रोत: Jagran की रिपोर्ट के आधार पर

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