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हरदवन गांव में ठप पड़ी मुख्यमंत्री नल-जल योजना, ग्रामीण पानी के लिए तरसे

CM's Nal-Jal Scheme Stalled in Hardawan Village, Residents Face Water Crisis

Dainik Bhaskar15 जुलाई 2026
हरदवन गांव

मुख्यमंत्री ग्रामीण नल-जल निश्चय योजना, जिसका उद्देश्य बिहार के हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, हरदवन गांव में ठप पड़ी हुई है। ग्रामीणों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है, जबकि योजना के तहत 35 फीट बोरिंग करने के बाद काम को अधूरा छोड़ दिया गया है। यह स्थिति सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि योजना के तहत बोरिंग तो की गई, लेकिन उसके आगे का काम नहीं किया गया। न तो पाइपलाइन बिछाई गई और न ही पानी की टंकी स्थापित की गई। बोरिंग को भी खुला छोड़ दिया गया है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। कई महीनों से यह स्थिति बनी हुई है और ग्रामीणों को दूर-दराज के इलाकों से पानी लाना पड़ रहा है या फिर हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो अक्सर खराब रहते हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इस संबंध में शिकायत की है, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। उनका आरोप है कि ठेकेदार ने काम में लापरवाही बरती है और बिना काम पूरा किए ही भुगतान प्राप्त कर लिया है। इस योजना में हुई धांधली की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि हरदवन के लोगों को जल्द से जल्द स्वच्छ पेयजल मिल सके।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित और पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध कराना है। लेकिन हरदवन गांव में यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है। ग्रामीणों ने सरकार से जल्द से जल्द इस अधूरे काम को पूरा करने और पानी की समस्या का समाधान करने की अपील की है।

The Chief Minister Rural Nal-Jal Nischay Yojana, a flagship scheme aimed at providing clean drinking water to every household in Bihar, has come to a standstill in Hardawan village. Despite a 35-foot borewell being dug under the scheme, the work was left incomplete, leaving villagers to suffer from a severe water crisis. This situation raises serious questions about the on-ground implementation of the government's ambitious program.

Residents report that while the borewell was drilled, no further work, such as laying pipelines or installing water tanks, was carried out. The open borewell also poses a safety hazard. For several months, villagers have been forced to fetch water from distant sources or rely on often-defunct handpumps. They claim to have repeatedly complained to officials and public representatives without any resolution. Allegations of contractor negligence and premature payment for incomplete work are rampant. Villagers are now demanding an investigation into the irregularities and swift completion of the project to ensure access to clean drinking water.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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