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साहिबगंज-मनिहारी गंगा पुल की गुणवत्ता जांचने दिल्ली मेट्रो की टीम, 10 दिन में सौंपेगी रिपोर्ट

Delhi Metro Team Inspects Quality of Sahibganj-Manihari Ganga Bridge, Report Due in 10 Days

Dainik Bhaskar3 नवंबर 2026
मनिहारीगंगा नदी पर निर्माणाधीन पुल

साहिबगंज-मनिहारी के बीच गंगा नदी पर बन रहे पुल के निर्माण कार्य में तेजी आने के साथ ही इसकी तकनीकी गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच शुरू कर दी गई है। यह पुल बिहार और झारखंड को सीधे जोड़ेगा। निर्माण कार्य निर्धारित अंतरराष्ट्रीय मानकों और स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप हो रहा है या नहीं, इसकी निष्पक्ष पड़ताल के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की पहल पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय तकनीकी टीम निर्माण स्थल पर डेरा डाले हुए है।

भारतीय रेलवे के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में पहुंची यह विशेषज्ञ टीम पिछले तीन दिनों से पुल के विभिन्न संरचनात्मक हिस्सों की गहन जांच कर रही है। टीम अगले 10 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट NHAI को सौंपेगी। जांच दल आधुनिक लेजर लाइट मशीनों और नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (NDT) जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का सहारा ले रहा है। इस आधुनिक तकनीक से कंक्रीट, पिलर, सेगमेंट, रीइन्फोर्समेंट, सरिया और बेयरिंग की मजबूती की जांच की जा रही है।

परियोजना अधिकारियों के अनुसार, पुल का धरातलीय काम लगभग पूरा हो चुका है और अब पूरा ध्यान सुपर स्ट्रक्चर यानी ऊपरी हिस्से के निर्माण पर है। ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर यह जांच पुल की दीर्घकालिक मजबूती और संरक्षा को पुख्ता करेगी। डीएमआरसी के महाप्रबंधक अनुराग गुप्ता ने पुष्टि की है कि टीम स्थल पर इस्तेमाल की गई सामग्री और कार्यप्रणाली का बारीकी से परीक्षण कर रही है। स्थानीय लोगों में वर्षों पुरानी इस बहुप्रतीक्षित मांग के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा होने को लेकर भारी उत्साह है।

विशेषज्ञ दल नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट तकनीक का उपयोग करके पिलर और कंक्रीट की अंदरूनी ताकत का आकलन कर रहा है। इस वैज्ञानिक पद्धति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि निर्माण की गुणवत्ता, घनत्व और मजबूती जांचने के लिए कंक्रीट या पिलर को तोड़ने या खुरचने की आवश्यकता नहीं पड़ती। अल्ट्रासोनिक पल्स और अत्याधुनिक लेजर लाइट सेंसर के जरिए कंक्रीट के भीतर किसी भी प्रकार के खाली स्थान (एयर पॉकेट्स), दरार या अंदरूनी कमजोरी का सटीक पता लगाया जा रहा है।

An independent technical quality inspection has begun on the ongoing Ganga River bridge project between Sahibganj and Manihari, which will directly connect Bihar and Jharkhand. To ensure the construction adheres to international standards and approved designs, a three-member high-level technical team from Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) has been deployed at the site, initiated by the National Highways Authority of India (NHAI).

Led by a retired senior Indian Railways official, the expert team has been intensively examining various structural components of the bridge for the past three days. They are expected to submit their detailed report to NHAI within the next 10 days. The inspection utilizes advanced equipment such as modern laser light machines and Non-Destructive Testing (NDT) techniques to assess the strength of concrete, pillars, segments, reinforcement, rebar, and bearings.

Project officials state that the foundational work of the bridge is largely complete, with current focus shifting to the construction of the superstructure. This timely inspection aims to ensure the long-term durability and safety of the bridge. DMRC General Manager Anurag Gupta confirmed that the team is meticulously testing the materials and methodologies used on-site. Local residents are highly enthusiastic about the timely and quality completion of this long-awaited project.

The expert team employs NDT methods to evaluate the internal strength of pillars and concrete without causing damage. This scientific approach uses ultrasonic pulses and advanced laser light sensors to precisely detect any air pockets, cracks, or internal weaknesses within the concrete.

hamarazila.in डेस्क · AI-सहायता से तैयार · संपादकीय नीति

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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