प्रमंडलTirhutSaranDarbhangaKosiPurniaBhagalpurMungerPatnaMagadh
व्यापारBusiness#Gaya#gayadiwali#waterdiyas

गया के बाजार में पानी से जलने वाले अनोखे दीये, जानिए इसके पीछे का विज्ञान

Water-Activated Diyas Hit Gaya Markets for Diwali: The Science Behind Them

ETV Bharat7 नवंबर 2026
जीबी रोड

गया: बिहार के गया में इस दीपावली के त्योहार पर बाजार में पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ-साथ कई आधुनिक और कृत्रिम दीये भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। इस साल सबसे ज्यादा चर्चा उन दीयों की है जो पानी डालते ही जल उठते हैं।

गया शहर के प्रसिद्ध जीबी रोड पर सजी दुकानों में फाइबर से बने ये अनोखे दीये बिना किसी आग, माचिस, तेल या घी के जलते हैं। जैसे ही इनमें पानी डाला जाता है, ये तुरंत रोशनी से जगमगा उठते हैं, जिसे देखने और खरीदने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है।

पूर्व अटल टिंकरिंग लैब इंचार्ज देवेंद्र कुमार ने बताया कि यह कोई जादू नहीं बल्कि विज्ञान है। ये दीये एक इलेक्ट्रिक सर्किट तकनीक पर काम करते हैं, जिसमें एक छोटा एलईडी बल्ब, बटन सेल बैटरी, ट्रांजिस्टर और दो मेटल पिन (वाटर सेंसर) लगे होते हैं। जब खनिज युक्त पानी दीये में डाला जाता है, तो पानी दोनों मेटल पिनों के बीच एक कंडक्टर का काम करता है, जिससे सर्किट पूरा हो जाता है और एलईडी बल्ब जल उठता है।

इस फेस्टिव सीजन में सेंटेड (सुगंधित) मोमबत्तियों की भी काफी मांग है, खासकर जेली मोमबत्तियां जो लगभग दो दिनों तक लगातार जल सकती हैं। ये मोमबत्तियां रोशनी के साथ-साथ खुशबू भी बिखेरती हैं।

हालांकि, एक तरफ आधुनिक दीयों की धूम है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक मिट्टी के दीये इस बार महंगे हो गए हैं। स्थानीय कुम्हार उदय कुमार ने बताया कि कच्चे माल यानी मिट्टी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल 1000 रुपये प्रति ट्रैक्टर मिलने वाली मिट्टी इस बार 1500 रुपये प्रति ट्रैक्टर हो गई है, जिससे दीयों की लागत बढ़ गई है। अब मिट्टी के दीये 100 रुपये से लेकर 300 रुपये प्रति सैकड़ा (100 पीस) की दर से बिक रहे हैं, जबकि पिछले सालों में इनकी कीमत 50 रुपये से 200 रुपये के बीच थी।

स्थानीय दुकानदार दीपक कुमार गुप्ता ने बताया कि वे ये अनोखे उत्पाद खास तौर पर कोलकाता से मंगाते हैं। उनके पास 300 रुपये में 12 पीस पानी से जलने वाले दीये और 250 रुपये से शुरू होने वाली हांडी मोमबत्तियां उपलब्ध हैं। इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स और कृत्रिम दीयों के बाजार में छा जाने से मिट्टी के दीयों की बिक्री में थोड़ी कमी आई है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के कारण इनकी मांग आज भी बरकरार है। दीपावली पूजन के लिए धान की बाली की भी बाजार में काफी डिमांड देखी जा रही है।

Gaya, Bihar: This Diwali season, Gaya's markets are witnessing a unique blend of traditional earthen lamps and modern, artificial diyas. Among the most talked-about are the water-activated diyas that light up instantly when water is poured into them.

These fiber-made diyas, prominently displayed on Gaya's famous GB Road, require no fire, matches, oil, or ghee. Their instant illumination upon contact with water has drawn large crowds of curious buyers.

Devendra Kumar, former in-charge of Atal Tinkering Lab, explained the science behind these 'magical' lamps. They operate on an electric circuit technology, featuring a small LED bulb, a button cell battery, a transistor, and two metal pins (water sensors). When mineral-rich water is added, it acts as a conductor between the metal pins, completing the circuit and illuminating the LED bulb.

Alongside these innovative diyas, scented candles, particularly jelly candles that can burn continuously for up to two days, are also in high demand, offering both light and fragrance.

However, the rising popularity of modern lamps has coincided with an increase in the prices of traditional earthen diyas. Local potter Uday Kumar stated that the cost of raw material (clay) has risen significantly, from ₹1000 per tractor last year to ₹1500 this year. This has pushed the price of earthen diyas to ₹100-₹300 per hundred pieces, compared to ₹50-₹200 in previous years.

Local shopkeeper Deepak Kumar Gupta mentioned that these novel items are sourced from Kolkata. He offers water-activated diyas at ₹300 for 12 pieces and 'handi' candles starting from ₹250. Despite the competition from artificial lamps, traditional earthen diyas continue to hold their significance due to religious beliefs. There's also a high demand for paddy stalks for Diwali rituals.

hamarazila.in डेस्क · AI-सहायता से तैयार · संपादकीय नीति

स्रोत: ETV Bharat की रिपोर्ट के आधार पर

वॉर्ड WhatsApp ग्रुप में भेजेंShare to Ward WhatsApp Group

इस खबर का आपके इलाके से रिश्ता

गया ज़िले का आधिकारिक आंकड़ा — नदी स्तर, प्रतिनिधि, ज़रूरी सुविधाएँ

नज़दीकी ज़रूरी सुविधाएँ

Punjab National Bank

Axis

SBI

Gaya की और खबरेंMore from Gaya

अपराध

गया में NIA की छापेमारी: फर्जी करेंसी रैकेट के तीन ठिकानों पर दबिश, जांच जारी

गया जिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बुधवार को फर्जी करेंसी रैकेट के मामले में छापेमारी की। एजेंसी की टीमों ने आमस थाना क्षेत्र में दो और बाराचट्टी में एक ठिकाने समेत कुल तीन स्थानों पर दबिश दी। गया के एसएसपी सुशील कुमार ने NIA की कार्रवाई की पुष्टि की है। हालांकि, अब तक किसी की गिरफ्तारी या बड़ी बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। NIA फर्जी करेंसी के नेटवर्क के तार और इसमें शामिल लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। टीम ने कुछ साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेज जुटाए हैं, जिनकी जांच जारी है।

Dainik Bhaskar · 📍 आमस