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झंझारपुर: एपेक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द, अन्य अवैध नर्सिंग होम पर कार्रवाई न होने से लोग आक्रोशित

Jhanjharpur: Apex Hospital's License Revoked, Public Outcry Over Inaction Against Other Illegal Nursing Homes

Dainik Bhaskar2 नवंबर 2026
मोहना जीरो माइलप्रखंड: झंझारपुरएनएच-27 किनारे

झंझारपुर, मधुबनी: झंझारपुर के मोहना जीरो माइल एनएच-27 किनारे स्थित एपेक्स अस्पताल का निबंधन रद्द होने के बाद शहर में यह खबर चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर जहां लोगों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर सिविल सर्जन मधुबनी द्वारा की गई इस कार्रवाई को नाकाफी बताया जा रहा है।

स्थानीय जानकारों का कहना है कि एपेक्स से पहले भी झंझारपुर में कई निजी अस्पतालों में अनियमितताएं सामने आई हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर ही मामलों को दबा दिया गया। लोगों का आरोप है कि जच्चा-बच्चा की मौत, हंगामा और तोड़फोड़ की घटनाओं पर स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन अक्सर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि 'पीड़ित परिवार ने आवेदन नहीं दिया, हम क्या करें' और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि झंझारपुर में लगभग एक दर्जन अवैध नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं, जहां अक्सर जच्चा-बच्चा की मौत पर हंगामा होता है। ऐसी घटनाओं के बाद पुलिस मौके पर पहुंचकर 24 घंटे तक स्थिति को शांत कराती है। हालांकि, जिस स्वास्थ्य विभाग की इन पर निगरानी की जवाबदेही है, वह 36 घंटे बाद जांच के लिए पहुंचता है। लोगों का आरोप है कि संबंधित नर्सिंग होम को कागजात जमा करने के लिए 24 घंटे से 3 दिन तक का समय दे दिया जाता है। इसके बाद कागजात जमा हुए या नहीं, इसकी जानकारी आम लोगों को नहीं मिल पाती। कुछ दिनों बाद ही वही संचालक नाम, बोर्ड और स्थान बदलकर फिर से अपना धंधा शुरू कर देते हैं।

स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से ही ऐसे नर्सिंग होम या जांच घर नाम बदलकर दूसरी जगह खोल दिए जाते हैं। विभाग में बरसों से एक ही जगह जमे कुछ अधिकारी-कर्मचारी इस खेल में शामिल हैं, जिसके कारण यह अवैध कारोबार लगातार फल-फूल रहा है। लोगों ने सवाल उठाया है कि एपेक्स से पहले जिन अस्पतालों की जांच हुई, उन पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Jhanjharpur, Madhubani: The revocation of Apex Hospital's license, located near Mohana Zero Mile on NH-27 in Jhanjharpur, has become a major topic of discussion in the town. While many have welcomed this action, some are calling the Madhubani Civil Surgeon's move insufficient.

Local sources, speaking anonymously, revealed that similar incidents of irregularities have occurred in several private hospitals in Jhanjharpur even before Apex, but these matters were often suppressed at the local level. Residents allege that in cases of maternal and infant deaths, protests, and vandalism, the health department and local administration frequently evade responsibility by stating that 'the victim's family did not file an application.' Consequently, these cases are shelved.

Locals claim that approximately a dozen illegal nursing homes are operating in Jhanjharpur, where incidents of maternal and infant deaths frequently lead to public uproar. After such events, the police arrive and maintain peace for up to 24 hours. However, the health department, which is responsible for oversight, only initiates an investigation 36 hours later. It is alleged that these nursing homes are given 24 hours to 3 days to submit their documents, and the public never learns whether the documents were submitted. Soon after, the same operators reopen their businesses under a new name, board, and location.

Residents directly accuse the health department of complicity, asserting that nursing homes or diagnostic centers are reopened elsewhere with changed identities due to the department's consent. They claim that certain long-serving officials and staff members within the department are enabling this ongoing illegal activity. Questions are being raised about why no concrete action has been taken against other hospitals investigated before Apex, casting serious doubts on the health department's operational integrity.

hamarazila.in डेस्क · AI-सहायता से तैयार · संपादकीय नीति

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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