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कॉलेजियम व्यवस्था खत्म कर जुडिशरी सर्विस कमीशन बने: नागमणि कुशवाहा

Former Union Minister Nagmani Kushwaha Demands End to Collegium System, Calls for Judiciary Service Commission

Dainik Bhaskar30 सितंबर 2026
मोहनिया

पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री नागमणि कुशवाहा ने कैमूर जिले के मोहनिया में न्यायपालिका में सुधार की मांग की है। उन्होंने कॉलेजियम व्यवस्था को समाप्त कर 'जुडिशरी सर्विस कमीशन' के गठन की वकालत की। कुशवाहा ने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका का निष्पक्ष होना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली के कारण कुछ ही परिवारों का न्यायपालिका में दबदबा बना हुआ है।

नागमणि कुशवाहा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट में लगभग 96% और हाई कोर्ट में 75 से 80% जज सवर्ण समाज से हैं। इसके विपरीत, देश की 90% आबादी (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक) का प्रतिनिधित्व सुप्रीम कोर्ट में केवल 4% और हाई कोर्ट में 10 से 12% ही है। उनका तर्क है कि कॉलेजियम व्यवस्था के कारण योग्य व्यक्तियों को न्यायपालिका में मौका नहीं मिल पाता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रपति से अपील की है कि कॉलेजियम व्यवस्था को खत्म कर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर 'जुडिशरी सर्विस कमीशन' का गठन किया जाए। इससे जजों की नियुक्ति योग्यता और मेरिट के आधार पर हो सकेगी, जिससे न्यायपालिका में सभी वर्गों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। नागमणि कुशवाहा ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा और संसद व सुप्रीम कोर्ट का घेराव भी किया जाएगा।

Former Union Minister Nagmani Kushwaha has called for judicial reforms in Mohania, Kaimur district, demanding the abolition of the collegium system and the establishment of a 'Judiciary Service Commission'. Kushwaha emphasized the necessity of an impartial judiciary in a democracy, stating that the current collegium system has led to the dominance of a few families within the judicial system.

Kushwaha presented statistics, highlighting that approximately 96% of Supreme Court judges and 75-80% of High Court judges belong to the upper castes. In contrast, the 90% of the population comprising SC, ST, OBC, and minorities is represented by only 4% in the Supreme Court and 10-12% in High Courts. He argued that the collegium system prevents deserving individuals from getting opportunities in the judiciary.

He has urged the Prime Minister, Home Minister, and President to abolish the collegium system and form a 'Judiciary Service Commission' akin to the UPSC. This, he believes, would ensure that judges are appointed based on merit and qualifications, leading to fair representation for all sections of society in the judiciary. Nagmani Kushwaha warned of a nationwide agitation, including gherao of Parliament and the Supreme Court, if his demands are not met.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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