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नवादा के किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह: पारंपरिक रोपाई के बजाय करें धान की सीधी बुवाई

Nawada Farmers Advised to Adopt Direct Seeded Rice Amidst Monsoon Delays

Dainik Bhaskar16 जुलाई 2026

नवादा जिले में इस साल मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश की कमी के कारण धान की पारंपरिक रोपाई मुश्किल हो गई है, जिससे किसान असमंजस में हैं। इसी को देखते हुए, कृषि विज्ञान केंद्र, नवादा के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे पारंपरिक रोपाई के बजाय धान की सीधी बुवाई (Direct Seeded Rice - DSR) विधि अपनाएं।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि धान की सीधी बुवाई कम पानी में भी संभव है और यह विधि सूखे जैसी स्थिति से निपटने में मददगार साबित होगी। इस विधि में, धान के बीज को सीधे खेत में बोया जाता है, जिससे नर्सरी तैयार करने और फिर रोपाई करने की आवश्यकता नहीं होती। इससे न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि श्रम और समय की भी बचत होती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों की तैयारी करें और उपलब्ध नमी का लाभ उठाते हुए सीधी बुवाई शुरू करें।

एडवाइजरी में यह भी बताया गया है कि सीधी बुवाई के लिए धान की कौन-कौन सी किस्में उपयुक्त रहेंगी, और बुवाई का सही समय क्या है। वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत बीज और खाद के उचित उपयोग के बारे में भी जानकारी दी है। इसके अलावा, कीट और रोग प्रबंधन के लिए भी आवश्यक सुझाव दिए गए हैं, ताकि फसल को किसी भी संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को आश्वस्त किया है कि वे किसी भी समस्या या जानकारी के लिए केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। उनका लक्ष्य है कि मानसून की अनिश्चितता के बावजूद, किसान इस वर्ष भी अच्छी फसल प्राप्त कर सकें। इस पहल से नवादा के किसानों को सूखे की चुनौती का सामना करने और अपनी उपज को सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Farmers in Nawada district are facing significant challenges this year due to erratic monsoon patterns and insufficient rainfall, making traditional paddy transplantation difficult. In response, agricultural scientists from the Krishi Vigyan Kendra (KVK), Nawada, have issued a crucial advisory. They are urging farmers to adopt the Direct Seeded Rice (DSR) method instead of conventional transplantation.

According to agricultural experts, DSR is a viable solution for water-scarce conditions, as it requires less water compared to traditional methods. In DSR, paddy seeds are sown directly into the field, eliminating the need for nursery preparation and subsequent transplanting. This not only conserves water but also saves labor and time. Farmers are advised to prepare their fields and utilize the available moisture to begin direct seeding.

The advisory also provides recommendations on suitable paddy varieties for DSR, optimal sowing times, and the proper use of improved seeds and fertilizers. Furthermore, essential tips for pest and disease management have been included to protect crops from potential damage. The KVK scientists have assured farmers of their continued support and guidance to ensure a good harvest despite the unpredictable monsoon. This initiative aims to help Nawada's farmers overcome drought challenges and secure their yields.

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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