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पीर नुनुआ शाह के उर्स में अकीदतमंदों ने चादरपोशी कर अमन की दुआ मांगी

Devotees Offer Chadar at Peer Nunua Shah's Urs, Pray for Peace

Dainik Bhaskar28 अक्टूबर 2026
प्रखंड: बिहपुरनुनुआ शाह की मजार

बिहपुर: पीर नुनुआ शाह के उर्स के अवसर पर उनकी मजार पर बड़ी संख्या में जायरीनों ने चादरपोशी की और अमन-चैन की दुआ मांगी। चादरपोशी के बाद फातिहाखानी की रस्म अदा की गई। मान्यता है कि इस मजार पर सच्चे मन से मांगी गई हर दुआ कबूल होती है और कोई भी जायरीन यहां से खाली हाथ नहीं लौटता है। सेवादार सुबोध पासवान ने यह जानकारी दी।

उर्स के इस अवसर पर मजार परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया था, जिससे यहां का माहौल और भी भक्तिमय हो गया था। कुछ अकीदतमंद गाजे-बाजे के साथ मजार पर हाजिरी लगाने पहुंचे, जिससे उत्सव का माहौल बन गया।

इस उर्स का आयोजन स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन की महिला सेल की अध्यक्षा माया देवी के संयोजन में किया जाता है। पीर नुनुआ शाह की मजार सांप्रदायिक सद्भाव का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग एक साथ मिलकर चादरपोशी करते हैं और अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में मनोज राय, मंटू राय, सच्चिदानंद, नित्यानंद, अनिल, राजेश और कैलाश पासवान सहित कई लोगों ने सहयोग किया। यह आयोजन बिहपुर की गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाता है।

On the occasion of Peer Nunua Shah's Urs, a large number of devotees offered 'chadar' (a ceremonial cloth) at his shrine in Bihpur, praying for peace and harmony. Following the chadarposhi, 'Fatiha' prayers were recited. It is widely believed that prayers offered with a true heart at this shrine are granted, and no devotee returns empty-handed, as stated by caretaker Subodh Paswan.

For the Urs, the shrine complex was beautifully adorned with colorful lights, enhancing the spiritual ambiance. Some devotees arrived with musical instruments, adding to the festive atmosphere of the event.

The Urs is organized under the coordination of Maya Devi, president of the women's cell of the Freedom Fighter Descendants Organization. Peer Nunua Shah's shrine is a significant symbol of communal harmony, where both Hindu and Muslim communities jointly offer chadars and express their devotion. Manoj Rai, Mantoo Rai, Sachidanand, Nityanand, Anil, Rajesh, and Kailash Paswan, among others, contributed to the success of the program. This event highlights the syncretic culture of Bihpur.

hamarazila.in डेस्क · AI-सहायता से तैयार · संपादकीय नीति

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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