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गंगा जल में बिहार को मिले औपचारिक हिस्सेदारी: केंद्र सरकार से 14 मांगें

Bihar Demands Formal Stake in Ganga Water, Puts 14 Demands to Centre on Water Security

Jagran26 सितंबर 2026
बाबू जगजीवन राम शोध संस्थान

पटना। गंगा जल संधि और फरक्का बैराज से संबंधित मुद्दों पर बिहार की जल सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार से 14 महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। बाबू जगजीवन राम शोध संस्थान में बिहार पॉलिसी डायलॉग के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय परिचर्चा में इन मांगों को सामने रखा गया। वक्ताओं ने जोर दिया कि गंगा बिहार और नेपाल के लिए केवल आस्था, सिंचाई और पेयजल का स्रोत नहीं है, बल्कि यह राज्य की आर्थिक गतिविधियों और समुद्र तक पहुंच का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

परिचर्चा में गंगा बेसिन के जल के न्यायसंगत उपयोग और बिहार की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रमुख मांगों में भारत-बांग्लादेश गंगा जल वार्ता में बिहार को एक औपचारिक हितधारक बनाना, ऊपरी राज्यों द्वारा गंगा जल के अत्यधिक उपयोग पर रोक लगाना और गंगा बेसिन के सभी आठ राज्यों की भागीदारी के साथ एक औपचारिक तंत्र स्थापित करना शामिल है। वक्ताओं ने यह भी मांग की कि जल की उपलब्धता और राज्यों की जरूरतों का आकलन होने तक ऊपरी राज्यों की नई जल परियोजनाओं को मंजूरी न दी जाए।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, सांसद सुधाकर सिंह, जल विशेषज्ञ नीलय उपाध्याय और पद्मश्री प्रो. रविंद्र सिन्हा जैसे प्रमुख व्यक्तियों ने इस चर्चा में भाग लिया। उन्होंने किसी भी नए या संशोधित समझौते से पहले सभी सह-घाटी राज्यों की सहमति लेने और गंगा की सहायक नदियों के जल योगदान को भी निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इसके अतिरिक्त, परिचर्चा में बक्सर से इलाहाबाद तक वर्ष भर 2.5 से तीन मीटर नौवहन गहराई बनाए रखने, गाद प्रबंधन के लिए नियमित ड्रेजिंग की व्यवस्था करने और बक्सर, पटना, सारण, भागलपुर, मोकामा, मुंगेर व कटिहार में मल्टी-मॉडल टर्मिनल विकसित करने की मांग की गई। फरक्का से जल छोड़ने की समय-सारणी को बिहार में नौवहन योग्य जल उपलब्ध कराने के अनुरूप तय करने पर भी जोर दिया गया।

Patna. Fourteen significant demands concerning Bihar's water security have been presented to the central government, focusing on the Ganga Water Treaty and the Farakka Barrage. These demands emerged from a one-day discussion organized under the banner of Bihar Policy Dialogue at the Babu Jagjivan Ram Research Institute.

Speakers emphasized that the Ganga is not merely a source of faith, irrigation, and drinking water for Bihar and Nepal, but also a crucial conduit for the state's economic activities and access to the sea. The discussion centered on ensuring equitable use of Ganga basin water and long-term water security for Bihar. Key demands include making Bihar a formal stakeholder in the India-Bangladesh Ganga water talks, curbing excessive water usage by upstream states, and establishing a formal mechanism involving all eight Ganga basin states. Speakers also called for no new water projects in upstream states to be approved until water availability and state needs are assessed.

Prominent figures such as former Assembly Speaker Uday Narayan Chaudhary, RJD State President Mangani Lal Mandal, MP Sudhakar Singh, water expert Nilay Upadhyay, and Padma Shri Prof. Ravindra Sinha participated in the discussion. They stressed the need for consent from all co-basin states before any new or revised agreements and for determining the water contribution from Ganga's tributaries.

Additionally, the discussion called for maintaining a navigable depth of 2.5 to 3 meters throughout the year from Buxar to Allahabad, regular dredging for silt management, and the development of multi-modal terminals in Buxar, Patna, Saran, Bhagalpur, Mokama, Munger, and Katihar. The scheduling of water release from Farakka was also urged to be aligned with ensuring navigable water in Bihar.

स्रोत: Jagran की रिपोर्ट के आधार पर

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