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बिहार में महंगाई का ग्रहण: शहरों से ज्यादा गांवों में कीमतों में उछाल

Inflation Grips Bihar: Rural Areas See Higher Price Hikes Than Cities

ETV Bharat18 अक्टूबर 2026
खाद्यान्न मंडीसितंबर

बिहार में त्योहारी सीजन के बावजूद महंगाई ने लोगों के बजट पर भारी असर डाला है। शारदीय नवरात्र, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों की तैयारी में जुटे परिवारों को रसोई के सामान से लेकर कपड़ों तक, हर चीज की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में महंगाई की दर शहरों से अधिक दर्ज की गई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर 6.08% रही, जो अगस्त में 5.24% थी। वहीं, शहरी इलाकों में यह सितंबर में 4.88% रही, जबकि अगस्त में 4.31% थी। खाद्य पदार्थों की महंगाई में भी गांवों की स्थिति बदतर है, जहां ग्रामीण खाद्य महंगाई दर 8.06% दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 7.18% थी।

इस महंगाई का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है। चावल, दाल, आटा और सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं। दुकानदारों के मुताबिक, पिछले साल 20 रुपये प्रति किलो मिलने वाला चावल अब 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। प्याज की कीमत भी छह महीनों में 10-20 रुपये से बढ़कर 55-60 रुपये प्रति किलो हो गई है।

पटना की खाद्यान्न मंडी में खरीदारी करने आई महिलाओं ने बताया कि हर चीज के दाम बढ़ गए हैं, जिससे किचन का बजट बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गृहिणियां प्याज, लहसुन और अदरक जैसी सब्जियों की मात्रा कम करने या विकल्प तलाशने को मजबूर हैं। केवल राशन ही नहीं, घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई, बिजली बिल और दवाओं का खर्च भी उन्हें पूरा करना होता है, जिससे रसोई पर बढ़ा खर्च अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए कम पैसे छोड़ता है।

महंगाई का असर केवल ग्राहकों पर ही नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों और दुकानदारों पर भी पड़ रहा है। प्याज व्यापारी लक्ष्मण कुमार के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ग्राहक कम मात्रा में सामान खरीद रहे हैं, जिससे बिक्री प्रभावित हो रही है। दिवाली और छठ के दौरान मांग बढ़ने की उम्मीद के बावजूद, कीमतों का दबाव कारोबारियों की चिंता बढ़ा रहा है, जिससे त्योहारी रौनक फीकी पड़ती दिख रही है।

Despite the festive season, inflation has severely impacted household budgets in Bihar. Families preparing for major festivals like Sharadiya Navratri, Diwali, and Chhath are grappling with increased prices for everything from kitchen staples to clothing. Surprisingly, rural areas have recorded a higher inflation rate compared to urban centers.

According to government data, the retail inflation rate in rural areas was 6.08% in September, up from 5.24% in August. In contrast, urban areas saw a retail inflation rate of 4.88% in September, compared to 4.31% in August. The situation is worse in villages regarding food inflation, with the rural food inflation rate recorded at 8.06%, while urban areas stood at 7.18%.

This inflation directly affects the monthly budgets of common families. Prices of rice, pulses, flour, and vegetables are skyrocketing. Retailers report that rice, which cost around ₹20 per kg last year, has now reached up to ₹45 per kg. Onion prices have also surged from ₹10-20 to ₹55-60 per kg in the last six months.

Women shopping at Patna's grain market expressed that all prices have risen, severely impacting their kitchen budgets. Homemakers are forced to reduce the quantity of vegetables like onions, garlic, and ginger or seek alternatives. Besides groceries, they also have to manage house rent, children's education, electricity bills, and medical expenses, leaving less money for other essential needs due to increased kitchen spending.

Inflation is not only affecting consumers but also small businesses and shopkeepers. According to onion trader Laxman Kumar, customers are buying smaller quantities due to price hikes, which is hurting sales. Despite the anticipated increase in demand during Diwali and Chhath, the pressure of rising prices is a growing concern for traders, dimming the festive cheer.

hamarazila.in डेस्क · AI-सहायता से तैयार · संपादकीय नीति

स्रोत: ETV Bharat की रिपोर्ट के आधार पर

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