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कुर्था में सहयोग शिविर प्रचार के अभाव में रहा बेअसर, अधिकारी-कर्मी और ग्रामीण भी रहे नदारद

Cooperation Camp in Kurtha Ineffective Due to Lack of Publicity, Officials and Villagers Absent

Dainik Bhaskar24 अक्टूबर 2026
पंचायत: बारा और पिंजरावांप्रखंड: कुर्थापंचायत भवन

अरवल जिले के कुर्था प्रखंड में आयोजित सहयोग शिविर प्रचार के अभाव में पूरी तरह बेअसर साबित हुआ। बारा और पिंजरावां पंचायत भवन में लगाए गए इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना था, लेकिन जानकारी के अभाव में न तो ग्रामीण फरियादी पहुंचे और न ही कई विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे।

बिहार सरकार हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को ग्राम पंचायतों में सहयोग शिविर का आयोजन करती है। इसका मकसद जमीनी स्तर पर लोगों की शिकायतों को सुनना और उनका त्वरित समाधान करना है, साथ ही उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना भी है। इन शिविरों में अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को उपस्थित रहकर शिकायतों पर कार्रवाई करनी होती है।

हालांकि, कुर्था प्रखंड में यह शिविर अपने मूल उद्देश्य से भटक गया। व्यापक प्रचार-प्रसार न होने के कारण अधिकांश ग्रामीणों को शिविर की जानकारी ही नहीं मिल पाई। इसके अतिरिक्त, कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी शिविर से नदारद रहे, जिससे इसकी उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान की बजाय यह शिविर केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया।

A cooperation camp organized in Kurtha block of Arwal district proved largely ineffective due to a lack of publicity. The camp, held in the Bara and Pinjarawan Panchayat Bhawans, aimed to address villagers' problems and provide them with government scheme benefits. However, due to insufficient awareness, few villagers attended, and several departmental officials and staff were also absent.

The Bihar government organizes these cooperation camps on the first and third Tuesdays of every month in various Gram Panchayats. The objective is to resolve people's issues at the grassroots level and ensure they receive benefits from government schemes. Officials from different departments are expected to attend these camps to hear grievances and take action.

However, in Kurtha block, this camp deviated significantly from its intended purpose. A lack of widespread publicity meant that most villagers were unaware of its existence. Furthermore, the absence of officials and staff from several key departments raised serious questions about the camp's effectiveness. Instead of solving villagers' problems, the camp merely became a formality.

hamarazila.in डेस्क · AI-सहायता से तैयार · संपादकीय नीति

स्रोत: Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के आधार पर

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