अनरसा
Anarsa
मिठाईपूरे बिहार में
अनरसा चावल और गुड़ की पारंपरिक तली मिठाई है, और यह उन व्यंजनों में है जो जल्दी नहीं बनते। चावल को भिगोकर, सुखाकर, पीसकर आटा बनाया जाता है, उसमें गुड़ मिलाकर मिश्रण को कई घंटे — कहीं रातभर — रखा जाता है, और तब तलाई होती है। ऊपर लगे तिल तलने पर कुरकुरे हो जाते हैं, और यही इसकी पहचान है।
कैसे बनता है
- चावल को कई घंटे भिगोया जाता है, फिर छाया में सुखाकर पीसा जाता है।
- आटे में गुड़ (या चीनी) मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है और उसे कई घंटे ढककर रखा जाता है।
- छोटी लोई बनाकर उसे तिल में लपेटा या एक तरफ़ तिल लगाया जाता है।
- धीमी आँच पर घी या तेल में तला जाता है; अनरसा तलते समय फूलता है।
- तलने के बाद अतिरिक्त घी निकलने के लिए इसे रखा जाता है।
कब खाया जाता है
- त्योहारों और सर्दियों में अधिक बनाया जाता है।
- कुछ क्षेत्रों में यह विशेष अवसरों और मेहमाननवाज़ी की मिठाई मानी जाती है।
कहाँ सबसे अच्छा मिलता है
- घर का बना अनरसा ही पारंपरिक माना जाता है; दुकानों पर यह हर जगह नहीं मिलता।
- त्योहारों के मौसम में स्थानीय मिठाई दुकानों पर मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
ज़रूरी बातें
- मिश्रण को पर्याप्त समय रखना ज़रूरी है — जल्दबाज़ी में अनरसा सही नहीं बनता।
- आँच धीमी रखें; तेज़ आँच पर गुड़ जल जाता है और कड़वाहट आ जाती है।
- तिल वाली सतह नीचे रखकर तलना शुरू करें ताकि तिल जुड़े रहें।
सामान्य प्रश्न
अनरसा किस चीज़ से बनता है?
चावल के आटे और गुड़ से, ऊपर तिल लगाकर, घी या तेल में तलकर।
अनरसा बनाने में समय क्यों लगता है?
चावल भिगोना-सुखाना-पीसना और मिश्रण को कई घंटे रखना — ये चरण टाले नहीं जा सकते।
अनरसा कब बनाया जाता है?
मुख्यतः त्योहारों और सर्दियों में।
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अंतिम अपडेट: 2026-10