ठेकुआ
Thekua
मिठाईपूरे बिहार में
ठेकुआ गेहूँ के आटे और गुड़ से बनी तली हुई मिठाई है, और बिहार में इसकी पहचान छठ से जुड़ी है — छठ का प्रसाद ठेकुआ ही है। इसकी सतह पर बना छापा सजावट नहीं, साँचे का निशान है, जिसे 'ठेकुआ सांचा' कहते हैं। यह कई दिन चलता है, इसलिए यह प्रसाद के साथ-साथ यात्रा और उपहार का भी व्यंजन रहा है।
कैसे बनता है
- गुड़ को पानी में घोलकर उसका रस तैयार किया जाता है; कहीं चीनी भी उपयोग होती है।
- गेहूँ के आटे में घी का मोयन देकर, गुड़ के रस से सख़्त आटा गूँथा जाता है — यह आटा मुलायम नहीं रखा जाता।
- कुछ घरों में नारियल का कस, सौंफ़ या इलायची मिलाई जाती है।
- लोई को साँचे पर दबाकर छापा दिया जाता है और आकार बनाया जाता है।
- धीमी आँच पर घी या तेल में तला जाता है — तेज़ आँच पर ऊपर जल जाता है और भीतर कच्चा रह जाता है।
कब खाया जाता है
- छठ का मुख्य प्रसाद — संध्या अर्घ्य के सूप में ठेकुआ रखा जाता है।
- छठ के दिनों में घर-घर बड़ी मात्रा में बनाया जाता है और बाँटा जाता है।
- सालभर भी बनता है, पर पहचान छठ से ही है।
कहाँ सबसे अच्छा मिलता है
- छठ के मौसम में घर का बना ठेकुआ ही सबसे अच्छा माना जाता है।
- मिठाई की दुकानों पर यह सालभर मिलता है, पर स्वाद घर के बने से अलग रहता है।
ज़रूरी बातें
- आटा सख़्त गूँथें — मुलायम आटे का ठेकुआ कुरकुरा नहीं बनता।
- आँच धीमी रखें; यही भीतर तक पकने का एकमात्र तरीक़ा है।
- प्रसाद के लिए बनाते समय शुद्धता के नियम घर की परंपरा के अनुसार निभाए जाते हैं।
- पूरी तरह ठंडा होने पर ही डिब्बे में भरें, वरना नमी से नरम पड़ जाता है।
सामान्य प्रश्न
ठेकुआ किस चीज़ से बनता है?
गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से; कहीं नारियल, सौंफ़ या इलायची भी मिलाई जाती है।
ठेकुआ छठ में क्यों बनाया जाता है?
यह छठ का मुख्य प्रसाद है और अर्घ्य के सूप में रखा जाता है।
ठेकुआ पर छापा किससे बनता है?
लकड़ी के साँचे से, जिसे ठेकुआ सांचा कहा जाता है।
ठेकुआ कितने दिन चलता है?
ठीक से तला और ठंडा करके रखा ठेकुआ कई दिन चलता है — इसी कारण यह यात्रा और उपहार के लिए भी बनता है।
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अंतिम अपडेट: 2026-10