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सिलाव खाजा

Silao Khaja

सिलाव खाजा नालंदा ज़िले के सिलाव क़स्बे की वह मिठाई है जिसे GI टैग मिला हुआ है। खाजा कई जगह बनता है, पर सिलाव का खाजा अपनी परतों के लिए अलग पहचाना जाता है — तोड़ने पर परतें साफ़ अलग दिखती हैं। सिलाव राजगीर और बिहार शरीफ़ के बीच मार्ग पर है, इसलिए राजगीर जाने-आने वाले यात्रियों के साथ यह मिठाई पूरे बिहार में पहुँची।

कैसे बनता है

  • मैदे की लोई में घी लगाकर बार-बार बेला और तह किया जाता है — परतें इसी चरण में बनती हैं।
  • तह की गई लोई काटकर आकार दी जाती है।
  • धीमी आँच पर तला जाता है, जिससे परतें खुलें और कुरकुरी हो जाएँ।
  • अंत में चाशनी में लपेटकर ठंडा किया जाता है।

कब खाया जाता है

  • उपहार और यात्रा की मिठाई — यह कई दिन चलती है।
  • त्योहारों पर भी आम, विशेषतः नालंदा क्षेत्र में।

कहाँ सबसे अच्छा मिलता है

  • सिलाव क़स्बा — सड़क किनारे खाजा दुकानों की कतार इसकी पहचान बन चुकी है।
  • राजगीर के बाज़ार में भी आसानी से मिलता है।

ज़रूरी बातें

  • तोड़कर परतें देखें — यही गुणवत्ता का सबसे सीधा परीक्षण है।
  • ताज़ा खाजा कुरकुरा होता है, नरम नहीं।
  • हवाबंद डिब्बे में रखें; नमी कुरकुरापन खत्म कर देती है।

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सामान्य प्रश्न

सिलाव खाजा को GI टैग कब मिला?

2018 में।

सिलाव कहाँ है?

नालंदा ज़िले में, राजगीर और बिहार शरीफ़ के बीच के मार्ग पर।

सिलाव खाजा की पहचान क्या है?

उसकी पतली, साफ़ अलग दिखने वाली परतें और कुरकुरापन।

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अंतिम अपडेट: 2026-10